
गुलशन कश्यप/जमुई. बिहार के जमुई जिले का एक गांव ऐसा है, जहां का पेड़ा केवल आस-पास के जिले ही नहीं बल्कि विदेशों में भी फेमस है. डेयरी उद्योग के लिए फेमस जिले का घनबेरिया गांव पेड़ा उत्पाद में काफी आगे निकल गया है. यहां लोग पेड़ा कारोबार से सालाना दो करोड़ तक का कारोबार कर रहे हैं. डेयरी उत्पाद के रूप में पेड़ा का व्यवसाय इस गांव के लोगों का मुख्य पेशा बन गया है.
दरअसल, जमुई जिले के घनबेरिया गांव में बीते दो दशक पहले पेड़ा बनाने की शुरुआत हुई थी और पेड़ा का पहला दुकान गांव में ही मुख्य सड़क पर शुरू हुआ था. इसके बाद एक-एक कर गांव के लोगों ने भी ऐसा करना शुरू किया और वहां पेड़ा की दुकान लगाने लगे. आज घनबेरिया में पेड़ा की एक दर्जन से अधिक दुकानें हैं, जिसमें प्रतिदिन क्विंटल के हिसाब पेड़ा का सप्लाई होता है.
सालाना दो करोड से अधिक पेड़ा का होता है कारोबार
स्थानीय दुकानदार संजय रावत बताते हैं कि यहां के पेड़ा की यह खासियत है कि इसमें दूध की शुद्धता को बरकरार रखा जाता है. जिस कारण लोग यहां का पेड़ा खाना पसंद करते हैं. इसके अलावा यहां खोआ भी बड़े पैमाने पर तैयार किया जाता है, जो बिना चीनी का होता है. एक एक दुकान में प्रतिदिन तीस से पचास किलो तक पेड़ा की सप्लाई होती है और पूरे साल यहां के सभी दुकानों से करीब दो करोड़ के पेड़े का कारोबार किया जाता है. उन्होंने बताया कि कुछ खास त्यौहार और पर्व के मौकों पर पेड़ा की सप्लाई तीन गुना तक हो जाती है और कभी कभार डिमांड इतनी होती है कि दिन-रात लगातार काम करने के वाबजूद भी हम डिमांड को पूरा नहीं कर पाते हैं.
अमेरिका और सऊदी अरब में है घनबेरिया के पेड़े की डिमांड
स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि जमुई में यहीं का पेड़ा बेचा जाता है. इसके लिए घनबेरिया में दुकानें बनाई ही गई है. साथ ही कई वेंडर्स हैं, जो घूम-घूम कर भी यहां का पेड़ा बेचते हैं. साथ ही पटना, देवघर जैसे शहरों में भी घनबेरिया के पेड़ा का स्टॉल है और हर रोज उन स्टॉल पर पेड़ा भेजा जाता है. इतना ही नहीं यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले नॉन रेजिडेंट इंडियन (एनआरआई) जब भी भारत आते हैं तो वह भी बड़े शौक से यहां का पेड़ा अपने साथ ले जाना पसंद करते हैं.
पेड़े की एडवांस बुकिंग
यहां के पेड़ा के बारे में एक बात और बहुत प्रचलित है कि त्यौहार के मौके पर पेड़ा की एडवांस बुकिंग होती है और लोग दो दिन पहले ही बुकिंग कराते हैं. खासकर श्रावण के महीने में हर सोमावरी को यह स्थिति देखने को मिलती है.
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FIRST PUBLISHED : June 17, 2023, 15:26 IST






