
हाइलाइट्स
जो साढ़ेसाती-ढैय्या के प्रभाव में हैं, उनको शनिवार के दिन शनि कवच का पाठ करना चाहिए.
इस पाठ को करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है.
शनिवार का दिन कर्मफलदाता शनि देव की पूजा-अर्चना के लिए है. शनि देव की पूजा करने और व्रत रखने से साढ़ेसाती-ढैय्या की दशा में राहत मिलती है. जिनकी कुंडली में शनि दोष है या फिर वे लोग जो साढ़ेसाती-ढैय्या के प्रभाव में हैं, उनको शनिवार के दिन शनि कवच का पाठ करना चाहिए. यदि संभव हो तो रोज पूजा के समय शनि महाराज का स्मरण करके शनि कवच का पाठ करें. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं कि किन 5 राशि के जातकों को जरूर शनि कवच का पाठ करना चाहिए.
5 राशिवाले पढ़ें शनि कवच
इस साल 5 राशियों मकर, कुंभ, मीन, कर्क और वृश्चिक पर शनि का प्रभाव है. मकर, कुंभ और मीन राशियों पर शनि की महादशा साढ़ेसाती चल रही है, वहीं कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों पर ढैय्या का प्रभाव है. इसको देखते हुए इन 5 राशिवालों को शनिवार का व्रत रखकर शनि देव की पूजा करनी चाहिए और उसे बाद शनि कवच का पाठ करना चाहिए.
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शनि कवच पाठ के फायदे
शनि कवच का पाठ करने से व्यक्ति को कष्ट, रोग, विपत्ति आदि से छुटकारा मिलता है. शारीरिक और मानसिक दुख दूर होते हैं. शनि देव की कृपा प्राप्त होती है. शनि देव के आशीर्वाद से व्यक्ति सुरक्षित रहता है. उनकी किसी भी प्रकार से हानि नहीं होती है. जो व्यक्ति नियमित तौर पर शनि कवच का पाठ करता है, वह साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभावों से बचा रहता है.
शनि कवच
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, शनैश्चरो देवता,
शीं शक्तिः, शूं कीलकम्, शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः
नीलाम्बरो नीलवपु: किरीटी गृध्रस्थितत्रासकरो धनुष्मान्।
चतुर्भुज: सूर्यसुत: प्रसन्न: सदा मम स्याद्वरद: प्रशान्त:।।
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श्रृणुध्वमृषय: सर्वे शनिपीडाहरं महंत्।
कवचं शनिराजस्य सौरेरिदमनुत्तमम्।।
कवचं देवतावासं वज्रपंजरसंज्ञकम्।
शनैश्चरप्रीतिकरं सर्वसौभाग्यदायकम्।।
ऊँ श्रीशनैश्चर: पातु भालं मे सूर्यनंदन:।
नेत्रे छायात्मज: पातु कर्णो यमानुज:।।
नासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा।
स्निग्धकण्ठश्च मे कण्ठ भुजौ पातु महाभुज:।।
स्कन्धौ पातु शनिश्चैव करौ पातु शुभप्रद:।
वक्ष: पातु यमभ्राता कुक्षिं पात्वसितस्थता।।
नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा।
ऊरू ममाSन्तक: पातु यमो जानुयुगं तथा।।
पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल:।
अंगोपांगानि सर्वाणि रक्षेन् मे सूर्यनन्दन:।।
इत्येतत् कवचं दिव्यं पठेत् सूर्यसुतस्य य:।
न तस्य जायते पीडा प्रीतो भवन्ति सूर्यज:।।
व्ययजन्मद्वितीयस्थो मृत्युस्थानगतोSपि वा।
कलत्रस्थो गतोवाSपि सुप्रीतस्तु सदा शनि:।।
अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्मद्वितीयगे।
कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्।।
इत्येतत् कवचं दिव्यं सौरेर्यन्निर्मितं पुरा।
जन्मलग्नस्थितान्दोषान् सर्वान्नाशयते प्रभु:।।
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Tags: Dharma Aastha, Shanidev
FIRST PUBLISHED : June 17, 2023, 07:30 IST






