दर्श अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में दूध अर्पित करने से पितृदोष होता है समाप्त, जानें कब है?


वेद प्रकाश,ऊधम सिंह नगर: हिंदू पंचांग के अनुसार साल में 12 दर्श अमावस्या पड़ी है. हर महीने पड़ने वाली अमावस्या का अलग-अलग महत्व है. आषाढ़ मास की अमावस्या को आषाढ़ अमावस्या और दर्श अमावस्या के नाम से जाना जाता है. दर्श अमावस्या के दिन सूर्योदय से पूर्व बरगद के पेड़ पर गाय का दूध अर्पित करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है, परिवार में खुशहाली और धन सम्पत्ति का आगमन होता है.

18 जून को पड़ेगी दर्श अमावस्या
आषाढ़ मास तिथि 18 जून दिन रविवार को दर्श अमावस्या पड़ेगी. दर्श अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद सूर्योदय से पूर्व बरगद के पेड़ पर गाय का दूध अर्पित करने और दान दक्षिणा करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है. वहीं अगले दिन गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है. इसलिए दर्श अमावस्या का महत्व और अधिक बढ़ जाता है.

धन संपत्ति में होती है वृद्धि
न्यूज 18 लोकल से बातचीत करते हुए पंडित अरुणेश मिश्रा ने बताया कि हर साल 12 बार अमावस्या पड़ती है और हर अमावस्या को अलग अलग नामों से पुकारा जाता है. आषाढ़ मास में पड़ने वाली अमावस्या को दर्श अमावस्या और आषाढ़ अमावस्या कहते हैं. उन्होंने कहा कि दर्श अमावस्या के अवसर पर सूर्योदय से पूर्व स्नान करके बरगद के पेड़ पर दूध अर्पित करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है, और परिवार में खुशहाली आती है और धन सम्पत्ति में वृद्धि होती है.

सोमवार से होगी गुप्त नवरात्रि की शुरूआत
पं० अरुणेश मिश्रा ने बताया कि आषाढ़ अमावस्या तिथि 18 जून दिन रविवार को पड़ेगी. आषाढ़ अमावस्या को स्नान दान का मुहूर्त सुबह 07:08 बजे से 12:37 बजे दोपहर तक हैं. उन्होंने कहा कि शुभयोग सुबह 08:53 बजे से 10:37 बजे तक लाभ उन्नति मुहूर्त हैं जबकि इसके बाद 10:37 बजे से 12:37 बजे दोपहर तक अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त हैं. वहीं अगले दिन गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है इसलिए दर्श अमावस्या का महत्व और अधिक बढ़ जाता है.

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FIRST PUBLISHED : June 17, 2023, 18:32 IST

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Author: Jagran Times

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