नई दिल्ली: फिल्म ‘आदिपुरुष’ (Adipurush) के एक सीन में जब भगवान हनुमान अशोक वाटिका में टहल रहे होते हैं, तो एक राक्षस उनसे कहता है कि ‘यह तेरी बुआ का बगीचा है जो हवा खाने चला आया.’ जब रावण को अंगद ललकारते हैं, तो कहते हैं, ‘रघुपति राघव राजा राम बोल और अपनी जान बचा ले, वरना आज खड़ा है कल लेटा हुआ मिलेगा.’ फिल्म में इसी तरह के कई टपोरी टाइप के डायलॉग हैं जिनकी चहुं ओर आलोचना हो रही है. फिल्म के डायलॉग लिखक मनोज मुंतशिर ने अपनी ओर से सफाई दी है और बताया है फिल्म में क्यों इस तरह के डायलॉग हैं.
मनोज मुंतशिर को विवादित डायलॉग लिखने की वजह से ट्रोल किया जा रहा है. ‘आजतक’ से हुई बातचीत में जब मनोज मुंतशिर से पूछ गया कि जो दर्शक अपने बच्चों को भगवान श्रीराम की मर्यादा और संस्कारों से अवगत कराने सिनेमाहॉल ले जाने को तैयार थे, क्या वे अब ऐसे डायलॉग की वजह से उन्हें यह फिल्म दिखाएंगे? मनोज मुंतशिर कहते हैं, ‘हमें टारगेट किया जा रहा है. हमारी कमी यह है कि हमने फिल्म को शुद्धता के पैमाने पर सेल नहीं किया. यह कभी नहीं कहा कि हम प्रामाणिक तौर पर उसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं जो वाल्मीकि ने ‘रामायण’ में लिखी थी. अगर हमें शुद्धता पर जाना था, तो फिर मैं अपनी गलती मानता हूं. मुझे फिर संस्कृत में लिखना था. फिर मैं लिखता ही नहीं, क्योंकि मुझ संस्कृत आती ही नहीं है.’
मनोज मुंतशिर आगे कहते हैं, ‘लेकिन शुद्धता कभी मकसद नहीं था. मकसद था उन बच्चों तक पहुंचना जो नहीं जानते भगवान राम कौन हैं. मुझे यह बताते हुए दुख हो रहा कि 10-12 साल के बच्चे भगवान राम के बारे में उतना ही जानते हैं, जितना उनके मां-बाप ने उन्हें बताया. घर पर उनकी तस्वीर देखी होगी, बस उतना ही जानते हैं. अगर हम उन्हें भगवान राम की कथा पढ़ा रहे हैं, एक ऐसे देश में जहां शाहजहां और बाबर की सात पुश्तों के बारे में पता और हमें भगवान राम के पिता दशरथ पता हैं, पर उनके पिता का नाम नहीं जानते.’
आदिपुरुष में ‘छपरी’ डायलॉग्स को लेकर मनोज मुंतशिर ने सफाई दी है.
‘आदिपुरुष’ के जरिये बच्चों-युवाओं को भगवान राम से कराना था अवगत
मनोज मुंतशिर ने कहा कि वे ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे, जो बच्चों तक पहुंचे. वे कहते हैं, ‘मैं कहना चाहता हूं कि सबकुछ सध नहीं सकता. कबीर ने कहीं कहा है कि आप गाल भी फुलाए और ठहाका भी लगाए, तो ऐसा हो नहीं सकता. जब हमने चाहा कि फिल्म युवाओं तक पहुंचनी चाहिए, तो वो हमारे बड़े-बुजुर्ग, जिन्होंने रामायण को खास ढंग से देखा-पढ़ा, जाना-समझा है, कहीं-न-कहीं हम उनकी धारणा से हटे होंगे, उनसे मैं हाथ जोड़कर क्षमा मांगता हूं, लेकिन यह जानबूझकर किया है, गलती से नहीं किया.’
मनोज मुंतशिर ने फिल्म के अच्छे डायलॉग का किया जिक्र
मनोज मुंतशिर कहते हैं, ‘कितनी बार इस देश में कोशिश होगी कि कोई फिल्म बने, जो इतने बड़े स्केल पर सनातन की कथा पहुंचाए. इसे खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं. मजे की बात यह है कि एक ही डायलॉग, एक ही लाइन हजार ट्विटर हैंडल से शेयर हो रही है. क्या पूरी दुनिया एक जैसा सोच रही है? भगवान राम शबरी के चरणों में बैठकर कह रहे हैं- ‘हम जन्म से नहीं, कर्म से छोटे या बड़े होते हैं’, इस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है. जब मां सीता कहती हैं कि राम ने मुझे पाने के लिए धनुष तोड़ा था, अब उन्हें रावण का घमंड तोड़ना होगा. इस पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा.
मनोज मुंतशिर ने लगाया आरोप
मनोज मुंतशिर ने आखिर में कहा, ‘पांच डायलॉग उठाकर अगर आप मुझे ट्रोल कर रहे हैं, तो मैं क्षमा चाहूंगा कि यह पूरी तरह से मुझे टारगेट करने की कोशिश है. मुझे अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ लोग हैं जिन्हें हमारी फिल्म से समस्या है, जिन्हें थियेटर में गूंजते जय श्रीराम के नारों से बहुत आपत्ति है. जय श्रीराम गूंज रहा है और वे घबरा रहे हैं. उन्हें डर लग रहा है कि ऐसा कभी देश में हुआ नहीं. कुछ वक्त पहले, इस देश में खुद को हिंदू कहना पाप समझा जाता था. मैं जब बड़ा हो रहा था, तो मुझे डर था कि अगर मैंने खुद को हिंदू बता दिया तो मुझे जेल में ठूस दिया जाएगा. आज जय श्रीराम की जयघोष हो रही है. मैंने थिएटर में मास्क लगाकर पिक्चर देखी है. आप जिन डायलॉग का जिक्र कर रहे हैं, उन पर दर्शक हंस रहे हैं, ताली बजा रहे हैं, खुश हो रहे हैं. ये थियेटर के अंदर का माहौल है.’ बता दें कि ‘आदिपुरुष’ कल 16 जून को रिलीज हुई. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म ने मिले-जुले रिव्यू के बावजूद दुनियाभर में पहले दिन करीब 150 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया.
.
Tags: Adipurush, Manoj Muntashir
FIRST PUBLISHED : June 17, 2023, 17:31 IST






