
इंसान की कल्पना इस तरह से बहुत चलती है कि क्या होगा अगर….? वैसे तो यह कपोल कल्पना ही होती है, लेकिन कई बार इस तरह के सवाल वैज्ञानिक पड़ताल की ओर भी ले जाते हैं. ऐसा ही एक सवाल है, जिसका जवाब आसान है और शायद बहुत से लोग इसके सही जवाब का अंदाजा भी लगा लें, क्या होगा अगर दुनिया से इंसान गायब हो जाएं और उसके एक साल बाद संसार कैसा होगा? इस सवाल के जवाब में वास्तव में हम यही जानना चाहेंगे कि इंसान ने दुनिया को कितना बदला है और क्या आज बिना इंसान के दुनिया की कल्पना करना संभव भी है या नहीं आइए जानते हैं इस बारे में क्या कहता है विज्ञान?
बिना इंसान की दुनिया?
हम ऐसी दुनिया की कल्पना करने का प्रयास कर रहे हैं जिसमें आज की पृथ्वी के सभी जीव होंगे लेकिन बस इंसान ही नहीं होंगे जिसने पूरी पृथ्वी के पारिस्थतिकी तंत्र को बहुत ही ज्यादा प्रभावित कर ही दिया है, खुद का भी एक अलग पारिस्थितिकी तंत्र बना लिया है. सोचिए, एकाकाएक यह तंत्र गायब हो जाए. यानि क्या होगा हमारी बनाई हुई चीजों का? क्या होगा उन सभी वस्तुओं और प्रक्रियाओं का जिनका हम रोज रखरखाव करते आ रहे हैं?
हमारा कुछ नहीं
फर्ज कीजिए कि अचानक सारे इंसान पृथ्वी से गायब हो जाते हैं और एक साल तक पृथ्वी बिना इंसानों के रहती है और फिर आप वापस यह देखने के लिए प्रकट होते हैं कि यहां क्या हाल है. तो सबसे पहले आप यही सोचेंगे कि आपकी दुनिया कहां है.आपके टीवी, किताबें, बिजली है या नहीं, पानी खाने की वस्तुएं मिल रही हैं या नहीं, लेकिन यह सब केवल आप अभी सोच रहे हैं.
आवाज सुनने की कोशिश
अमेरिका की इओवा स्टेट यूनिवर्सिटी में कम्यूनिटी एंड रीजनल प्लानिंग और अर्बन डिजाइन के एसोसिएट प्रोफेसर कार्लटन बैसमैजियान द कन्वरसेशन के अपने लेख में इस सवाल का जवाब विस्तार से देते हुए कहते हैं कि सबसे पहले अगर हम एक साल बाद बिना इंसान की दुनिया में वापस आएंगे तो हम देखेंगे नहीं बल्कि सुनने की कोशिश करेंगे.
ज्यादा नीला होगा आसमान
एक साल बाद आते ही हमें सबसे पहले तो बहुत ही शांति महसूस होगी क्योंकि दुनिया में इंसानी गतिविधियां और उनका शोर खत्म हो चुका होगा जिसके हमें आदत लग चुकी है. कारें, कारखाने, आसापस की मशीनें जैसे कूलर वगैरह, सभी बंद हो चुकी होंगी. इसके बाद हमारा ध्यान जाएगा मौसम पर आसामान ज्यादा साफ और नीला दिखाई देगा क्योंकि प्रदूषण खत्म हो चुका होगा और वायुमंडल तेजी से बहाल हो रहा होगा.
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Tags: Climate, Earth, Environment, Nature, Research, Science, Weather
FIRST PUBLISHED : June 17, 2023, 16:32 IST






