मेहनत करने वालों की हार नहीं होती…कपड़ा मिल में काम करने वाले मजदूर को NEET में मिली सफलता, अब बनेगा डॉक्टर


मनमोहन सेजू/बाड़मेर. कहते है ना कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती. पश्चिम राजस्थान के बाड़मेर में ये बातें एक बार फिर से सच साबित हुई हैं. सरहदी बाड़मेर जिले के अणखिया, नोखड़ा गांव के सूर्यप्रकाश ने विपरित परिस्थितियों के बावजूद कड़ी मेहनत से वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसे पाना ग्रामीण इलाके में रहने वाले लोगों के लिए महज एक सपना होता है. सूर्यप्रकाश ने नीट में ऑल इंडिया रैंक 2898 जबकि ओबीसी कैटेगरी में 892वी रैंक हासिल की है.

सूर्यप्रकाश के पिता और दादा मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं. घर की माली स्थिति अच्छी नहीं है. उसकी मां घर चलाती हैं और पशुपालन से अपना गुजारा करती हैं. घर की माली हालात को देखते हुए सूर्यप्रकाश ने 11वीं कक्षा में साइंस सब्जेक्ट को नहीं चुना. साइंस में अच्छा होने के बावजूद सूर्यप्रकाश ने 11वीं में आर्ट्स लेकर पढाई जारी रखी. इस दौरान गर्मियों की छुट्टियों में वह मजदूरी भी करता रहा. सूर्यप्रकाश ने गुजरात मे कपड़ा मिल में 400 रुपये में मजदूरी भी की जिससे घर चलाने में मदद हो सके. सूर्यप्रकाश घर का इकलौता चिराग है. बाद में लोगों के कहने पर उसने साइंस ली.

परिवार के लिए 2 वक्त की रोटी का जुगाड़
सूर्यप्रकाश का परिवार हर दिन दो वक्त का खाना भी नहीं जुटा पाता था. उसका परिवार दो-तीन साल पहले तक एक कमरे के मिट्टी के घर में रहता था. इसके बाद राज्य सरकार की योजनाओं के तहत आर्थिक मदद मिली और पीएम आवास योजना के तहत दो कमरे का घर भी मिला. इतना ही नहीं इन्हें पालनहार योजना का लाभ नहीं मिला. जिससे इनके परिवार के लिए 2 वक्त की रोटी का जुगाड़ हो सके. 13 साल की उम्र से पहले ही प्रकाश ने दुकानों और खेतों में हेल्पर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया और ग्यारहवीं कक्षा में गुजरात मे कपड़ा मिल में शामिल हो गया.

15 साल से पिता का इलाज
सूर्यप्रकाश ने नीट में ऑल इंडिया रैंक 2898 जबकि ओबीसी कैटेगरी में 892वी रैंक हासिल की है. नीट में चयनित होने वाले सूर्यप्रकाश ने कहा, ‘पिता डूंगराराम मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं. बीते 15 वर्षों से जोधपुर के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है, जबकि उनकी माता एक ग्रहणी हैं. कृषि वपशुपालन ही परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते पढ़ाई के साथ-साथ मजदूरी पर भी जाना पड़ा. हालांकि इसके बावजूद भी मैंने नियमित अध्ययन जारी रखा जिसका परिणाम अब सबके सामने है’.

Tags: Local18, NEET, Neet exam

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Author: Jagran Times

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