
अपनी प्रजाति के मरे हुए जीव देखना किसी भी जानवर से लिए अच्छा अनुभव नहीं होता है. यही बात मक्खियों पर भी लागू होती है. शोधों ने दर्शाया है कि जब मक्खियां मरती हैं और उनके मृत शरीर को दूसरी मक्खियां देखती हैं, कोउसका उन पर इतना बुरा असर होता है कि उनकी बाकी की जिंदगी तक छोटी हो जाती है और वे जल्दी मर जाती हैं. उनमें उत्साह खत्म हो जाता है, उनका फैट कम होने लगता है और उनके बूढ़े होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है. इससे वे अनुमानित समय से कहीं पहले मर जाती हैं. लेकिन नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इस बात का कारण पता लगा लिया है कि ऐसा क्यों होता है.
घर की बाकी मक्खियां भी जल्दी मरेंगी
यानि अगर हमारे घर में कहीं मक्खियां ज्यादा हों और वहां कोई एक भी मरी हुई मक्खी हो तो उसे वहीं छोड़ देने का फायदा हमें होगा क्योंकि उससे बाकी मक्खियां जल्दी मर जाएंगी. लेकिन आखिर ऐसा होता क्यों है इसकी जानकारी वैज्ञानिकों को नहीं मिल पाई थी. अब उन्होंने पता चल गया कि ऐसा क्यों होता है.
एजिंग प्रक्रिया हो जाती है तेज
साथी मक्खी के मरने के बाद उसे मृत शरीर को देखकर न्यूरोट्रांस्मीटर सेरोटोनिन के प्रति ग्राही प्रकार के दो न्यूरॉन तंत्रिकाएं सक्रिय हो जाती हैं. इस बढ़ी हुई गतिविधि से मक्खियों में एजिंग की प्रक्रिया तेज हो जाती है. यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के मनोवैज्ञानिक क्रिस्टी गेडॉर्न और तूहीन चक्रवर्ती की अगुआई में शोधकर्ताओं की टीम ने यह पड़ताल की.
बहुत उपयोगी होगा समझना
शोधकर्ताओं ने लिखा कि जिस तरह मृत्यु को जानकारी से न्यूरल सर्किट जरिए होने वाले प्रभाव और खुद सर्किट को समझना भविष्य के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा. इससे इंसानों के संवेदी अनुभवों को भी समझने में मदद मिल सकती है. जिसमें प्रमुख तौ पर खास तंत्रिका अवस्थाएं बर्ताव और मनोविज्ञान की कैसे प्रभावित करती हैं यह समझने में भी मदद मिलेगी.
संवेदी प्रक्रियाओं का असर
संवेदी प्रक्रियाएं उम्र की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं, लेकिन हमें यह जानकारी नहीं है कि यह होता कैसे है. पिछले शोध बताते हैं कि एक प्रजाति के मृत शरीर को देखने से, जिसे कोनस्पेसिफिक्स कहेते हैं. उसका सामान्य मक्खियों पर प्रभाव जरूर होता है. वे जल्दी मर जाते हैं जिसका कारण उस समय तक पता नहीं चल सका था.
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Tags: Environment, Health, Research
FIRST PUBLISHED : June 17, 2023, 12:26 IST






