
अर्पित बड़कुल/दमोह. भारत एक कृषि प्रधान देश है. जहां की 75 फीसदी आबादी गांवों में बसती है और खेती किसानी पर निर्भर है. खरीफ की फसल बुआई का सीजन आ चुका है. ऐसे में किसान खेत की तैयारी के बाद मानसून के आने का इंतजार कर रहे हैं. बुंदेलखंड सूखाग्रस्त इलाकों में से एक है, ऐसे में किसान की पूरी उम्मीद मानसून पर ही टिकी रहती है.
खरीफ की फसल उन फसलों को कहते हैं जिन्हें जून-जुलाई में बोते हैं. और अक्टूबर के आसपास काटते हैं. इन फसलों को बोते समय अधिक तापमान, नमी और पकते समय शुष्क वातावरण की आवश्यकता होती है. जिसको लेकर अब दमोह जिले के किसानो ने खरीफ़ की फसल को लेकर युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी है. और इस बार लगातार बारिश होने से खेतों में सुधार कार्य भी अच्छा हुआ हैं. जिसके चलते किसानों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है .जिससे अच्छी बोआई हो ताकि उत्पादन भी अच्छा हो सके.
3 लाख 15 हजार हेक्टेयर में होगी खरीफ की बुआई
खरीफ की फसल के आंकड़ों की ओर डाले तो जून जुलाई माह में बुवाई की जाने वाली खरीफ की फसल की तैयारियां शुरू हो गई हैं, लेकिन बुंदेलखंड में यदि समय पर बारिश नहीं हुई, तो तैयारियां धरी की धरी रह जाएंगी. कृषि विभाग द्वारा फसलवार लक्ष्य तय कर लिया गया है इस बार जिले में 3 लाख 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की फसल की बुआई होगी, जो बीते साल की अपेक्षा 3 हजार हेक्टेयर अधिक है.
कृषि वैज्ञानिक राजेश खबसे के मुताबिक बुवाई करने से पहले बीज उपचार करना आवश्यक है, जिससे अंकुरण के समय में कीट आदि से बचा जा सकता है. बीज रोपण के बाद फसल को समय-समय पर पानी मिलना बेहद जरूरी है, यदि मानसून रूठा तो किसानों की तैयारियों पर पानी फिर सकता है.
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FIRST PUBLISHED : June 17, 2023, 11:48 IST






