World Day against Child Labor 2023 Social Justice for All End Child Labor

हाइलाइट्स

दुनिया में आज 16 करोड़ बच्चे चाहे अनचाहे बालश्रम में लिप्त हैं.
2000 से 2020 के बीच बाल श्रमिकों की संख्या 16 फीसद से गिरकर 9.5 फीसद रह गई है.
दुनिया भर में केवल 26.4 फीसद बच्चों को ही सामाजिक संरक्षण नकद लाभ मिल पाते हैं.

मानव समाज में सभी इंसानों को उनके सही और पूरे अधिकार मिलें यह बहुत जरूरी है. इसके लिए बच्चों की सही परवरिश और अधिकार देने के महत्व को कम नहीं किया जा सकता. लेकिन दुर्भाग्य से दुनिया के कई इलाकों में बालश्रम अभी जारी है. इसी को खत्म करने की दिशा में सार्थक प्रयास करने किए हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है. इसमें सबसे बड़ी भूमिका में संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की होती है. यह दिवस एक मौका है कि दुनिया में बालश्रम को खत्म करने के सभी प्रयासों को बल मिले और लोगों में इसके प्रति जागरूकता फैला. इसमें सामाजिक न्याय की भी अपनी भूमिका है.

सभी के लिए न्याय
बालश्रम और सामाजिक न्याय की बीच की कड़ी को महत्व देते हए ही इस साल विश्व श्रम निषेध दिवस की थीम “सभी के लिए सामाजिक न्याय, बालश्रम का अंत करें” रखी गई है. पिछले तीन दशकों के बालश्रम केखत्म करने के प्रायसों के अनुभवों में पाया गया है कि उसे बिना मूल कारण को समझे खत्म नहीं किया जा सकता है.

एकजुटता की जरूरत
देखने में आ रहा है कि अब पहले से कहीं ज्यादा लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को खत्म करने के लिए बालश्रम को खत्म करना भी जरूरी होता जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट के मुताबिक 2023 में यह बदलाव लाया जा सकता है और इसके लिए लोगों को एकजुट होना होगा और किए जा रहे प्रयासों को संगठित कर तेज गति देने की जरूरत है.

सामाजिक न्याय से संभव
अभी तक के अनुभव साफ तौर पर बताते हैं कि सख्त कानून से इस समस्या को सुलझाया नहीं जा सकता क्योंकि इस समस्या की जड़ कुछ और ही है. बच्चों से श्रम करना अधिकांश जगह मजबूरी ज्यादा और अन्य सामाजिक समस्याओं के कारण होता है. इसी लिए उम्मीद करना गलत नहीं होगा कि सामाजिक न्याय से इस समस्या का हल निकल सकता है.

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बालश्रम केवल बच्चों की ही नहीं बल्कि एक सामाजिक समस्याओं का नतीजा है.
(प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

गरीबी और शिक्षा
इसकी एक छोटी से मिसाल  गरीबी है. अगर गरीबी दूर कर दी जाए तो बहुत से परिवारों में बच्चों को काम करने की जरूरत ही नहीं होगी और बालश्रम की समस्या कम हो जाएगी. लेकिन यहां एक पहलू शिक्षा का भी है. अगर लोगों और समाज को सही तरह से शिक्षित किया जाए तो लोग समझ सकेंगे कि बालश्रम अभिशाप क्यों  है क्योंकि कई जगहों पर बालश्रम को समस्या माना ही नहीं जाता है.

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अन्य कारक भी काम करते हैं
इसके अलावा सामाजिक असमानता, आर्थिक और अन्य भेदभाव आदि भी बालश्रम को जिंदा रखने में मदद करते हैं. संगठित अपराध भी बच्चों के अधिकार छीनता है यहां पर कठोर कानून की जरूरत होती है और साथ देश की सरकारों की ओर से कड़े और ठोस प्रायासों की भी. सही सामाजिक परिवेश ही इस समस्या से पूरी तरह से छुटकारा दिला सकता है.

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सही शिक्षा, नीति निर्माण, जागरूकता और अन्य प्रयास बालश्रम का उन्मूलन कर सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Wikimedia Commons)

जागरूकता का महत्व
इसमें कोई शक नहीं कि इस विषय पर जागरूकता का हर स्तर पर बहुत महत्व है. जहां लोगों का व्यक्तिगत स्तर पर बालश्रम के नुकसान क समझने की जरूरत है, वहीं नीति निर्माताओं के लिए भी यह समझना बहुत बहुत जरूरी है कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उन्हें शिक्षा का माहौल देना सबसे महत्वपूर्ण निवेश है जिसमें बालश्रम उन्मूलन एक प्राथमिकता का विषय बन जाता है. शिक्षा सामाजिक न्याय के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है और बालश्रम उन्मूलन के लिए हर स्तर काम करना जरूरी है

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दुनिया भर में 16 करोड़ बच्चे आज भी बाल श्रम में लगे हुए हैं जिनमें से कुछ तो 5 साल की उम्र तक के भी हैं. 2000 से 2020 के बीच बाल श्रमिकों की संख्या 16 फीसद से गिरकर 9.5 फीसद रह गई थी. यह संख्या इन 20 सालों में 8.55 करोड़ कम हुई थी. दुनिया में आज भी करीब तीन चौथाई बच्चे यानि 1.5 अरब बच्चे सामाजिक संरक्षण के अभाव में जी रहे है और दुनिया में 1.1 फीसद  से भी कम जीडीपी बच्चों के सामाजिक संरक्षण पर खर्च हो रहा है और अफ्रीका में तो यह04 फीसद से भी कम है.

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Author: Jagran Times

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