खुद सीखने के बाद बच्चों और बड़ों को सीका रहे तैराकी, साथ में पढ़ाई भी करते हैं


 शिवहरि दीक्षित / हरदोई. हरदोई में केवल एक ही स्वीमिंग पूल है जिसमे गर्मियों के दिनों में प्रतिदिन सैकड़ों लोग आकर स्वीमिंग पूल में नहाते हैं. मगर उन्हें तैराकी करने में समस्याएं आती थीं. जिसकी वजह से वह स्वीमिंग का अच्छे से आनंद नहीं ले पाते थे. वहीं अगर बच्चों की बात की जाए तो उन्हें भी स्वीमिंग में ट्रेन होने के लिए किसी कोच का सहारा चाहिेए था. बीते दो वर्षों में जो बच्चे या बड़े तैराकी के शौकीन हैं उन्हें अखिल स्वीमिंग की ट्रेनिंग देकर तैराक बना रहे हैं.

हरदोई में अभी तक कोई भी स्वीमिंग का ट्रेनर नहीं था मगर पिछले 12 वर्षों से तैराकी करने वाले अखिल शर्मा खुद स्वीमिंग को अच्छे से सीख कर दो वर्षों से लोगों को सिखा रहे हैं और इस वक्त उनके पास बच्चों के साथ साथ बड़े भी स्वीमिंग सीखने आते हैं. जिनमे से कुछ तो सरकारी कर्मचारी भी आते हैं जो कि स्वीमिंग में रुचि रखते हैं.

स्वीमिंग भी है स्पोर्ट्स का हिस्सा

स्वीमिंग करना कुछ लोगों के लिए शौक तो हो सकता है मगर स्वीमिंग एक स्पोर्ट्स भी है. यह शायद हरदोई वालों के लिए एक कहानी सी है क्योंकि यहां केवल एक ही स्वीमिंग पूल है जो अंग्रेजों के द्वारा बनवाया गया था. बाकी यहां के स्पोर्ट्स स्टेडियम कोई भी स्वीमिंग पूल नहीं है और ना ही यहांं इसकी कोई ट्रेनिंग देता है.

स्वीमिंग ट्रेनिंग के साथ करते हैं पढ़ाई

हरदोई के इकलौते स्वीमिंग ट्रेनर अखिल शर्मा बताते हैं कि वह 12 वर्षों से स्वीमिंग कर रहे हैं और इसी बीच वह पिछले दो वर्षों से यहां पर स्वीमिंग का शौक रखने वाले लोगों को ट्रेनिंग भी देते हैं. साथ ही अपना समय खराब ना करते हुए वह पढ़ाई भी करते हैं और सरकारी नौकरी पाने का प्रयास भी कर रहे हैं.

Tags: Hardoi News, Local18, Sports news, UP news

Source link

Jagran Times
Author: Jagran Times

Leave a Comment

Read More

उत्तर प्रदेश के बांदा निवासी 9 वर्षीय पुत्र ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया 2 मिनट में 200 देश के झंडे पहचान कर बताने वाला पार्थ झा नमक बच्चों ने इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है माता-पिता वर्तमान में मुंबई में रहते हैं डॉक्टर जे विक्रम चाइल्ड स्पेशलिस्ट चाइल्ड केयर नर्सिंग होम के मालिक मामा है मामा जी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि उनका भांजा पार्थ झा ने 2 मिनट में 200 देश के फ्लैग पहचान कर बताने में महारत हासिल की है महाराष्ट्र राज्य में स्थित संस्था ने गोल्ड मेडल और एक प्रमाण पत्र दिया है इस वक्त उसका नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ़ रिकार्ड्स मैं दर्ज किया गया है भांजा और बहन पार्थझा मां जयश्री पिता अशोक झा बांदा के रहने वाले हैं हालांकि इसमें कोई शक नहीं है इतनी कम उम्र में 200 देश के झंडों का पहचान करना यह एक चमत्कार ही है दिमाग इस बच्चे का कंप्यूटर की तरह कार्य कर रहा है बांदा का लाल मुंबई में रहकर नाम पैदा कर रहा है सिर्फ बांदा भर का नहीं पूरे विश्व में भारत का नाम ऊंचा किया