सीतापुर की एशिया प्रसिद्ध प्लाईवुड फैक्ट्री 25 साल से बंद, करोड़ों होता था टर्न ओवर, अब तक कई मजदूरों की मजदूरी नहीं मिली


हिमांशु श्रीवास्तव / सीतापुर में एशिया प्रसिद्ध प्लाईवुड प्रोडक्ट्स फैक्ट्री बंद हुए लगभग 25 साल बीत गए. यदि इस फैक्ट्री का दोबारा चक्का घूम पाता तो रोजगार की कमी नहीं होती है. जब फैक्ट्री के अच्छे दिन थे. उस वक्त यह फैक्ट्री 24 घंटे चलती थी. एक-एक हजार श्रमिक तीन शिफ्टों में काम करते थे. उस दौर में फैक्ट्री का हर महीने का टर्न ओवर 30 करोड़ रुपये से भी अधिक का था.

यहां का तैयार माल पूरे भारत में ही नहीं बल्कि, एशिया क्षेत्र के आस्ट्रेलिया, नेपाल, भूटान समेत कई देशों में पसंद किया जाता था. इसमें प्लाई, बोर्ड, दरवाजा, खिड़कियां, चौखट बनते थे. बैगास के बोर्ड कई तरह के बनाए जाते थे. यहां के बने उत्पाद की क्वालिटी पर पूरे एशिया को भरोसा था. कुछ इस तरह की प्लाईवुड फैक्ट्री सीतापुर शहर के बाहर हाईवे पर स्थापित थी. जहां आज सिर्फ अवशेष रूपी खंडहर शेष है.

25 सालों से बंद चल रही है फैक्ट्री

आफताब अहमद ने बताया कि प्लाईवुड फैक्ट्री लगभग 25 सालों से बंद चल रही है. इसमें हजारों कर्मचारी काम करते थे. उसके बाद बेरोजगार हो गए हैं. जहां-तहां काम कर रहे हैं. कोई रिक्शा चला रहा है. कंगाली की हालत में कोई घर बैठ गया है. इसकी प्लाई बहुत बढ़िया थी. दरवाजे खिड़कियां बहुत अच्छे क्वालिटी में बनाया जाता था.

437 श्रमिकों का बकाया मेहनताना भी फंसा है

शहर के बाहर एनएच-24 पर हुसैनगंज में प्लाईवुड फैक्ट्री 21 सितंबर 2001 से बंद है. 22 वर्ष हो गए हैं, 437 श्रमिकों का बकाया मेहनताना भी फंसा है. फैक्ट्री पर इनका करीब 35 करोड़ रुपये बाकी हैं. प्लाईवुड फैक्ट्री कर्मचारी संघ के आर्य बंधु आर्य का कहना है कि फैक्ट्री की प्रापर्टी सात करोड़ रुपये है. यह प्रापर्टी अंग्रेजों के बाद सरकार की होनी चाहिए थी. पर अभी तक ऐसा हो नहीं पाया है. 1939 में स्थापित हुई थी फैक्ट्री.

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