
हाइलाइट्स
आने वाले समय में पुराने रिकॉर्ड के विपरीत दुनिया में ग्रीष्म लहरें तापमान बहुत बढ़ा देंगी.
इससे वैश्विक खाद्य आपूर्ति के साथ साथ गेंहू की पैदावार पर भी बहुत बुरा असर पड़ेगा.
पहले से ही खाद्य संकट से जूझ रही दुनिया के लिए यह बहुत चिंताजनक संकेत हैं.
ग्लोबल वार्मिंग का मतलब केवल गर्मी के मौसम में ज्यादा तापमान ही नहीं है. बल्कि इससे पूरे साल भर के मौसम में बदलाव आने के साथ सूखा, बाढ़, भीषण ग्रीष्म लहरें जैसी चरम मौसमी घटनाएं भी देखने को मिलती हैं. इस तरह से जलवायु में समग्र बदलाव को जलवायु परिवर्तन के नाम से जाना जाता है जिसका ग्लोबल वार्मिंग केवल एक पहलू मात्र है. लेकिन इनके नतीजे बड़े व्यापक है और इनमें से एक है और एक बड़ा असर है हमारी खाद्य आपूर्ति पर असर. नए अध्ययन में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया में वैश्विक खाद्य आपूर्ति साथ ही गेहूं उत्पादन के पर भी बहुत ज्यादा विपरीत असर पड़ेगा.
बुरी तरह से खराब होंगी फसलें
टफ्ट्स यूनिवर्टी के फ्रायडमैन स्कूल ऑफ न्यूट्रीशन साइंस एंड पॉलिसी की एक समर्पित टीम की अगुआई में हुए अध्ययन में इस मुद्दे ने ध्यान खींचने का काम किया है. अध्ययन में साफ बताया गया है कि इस बात की संभावना अधिक हो गई कि चरम तापमान फसलों की पैदावार को बुरी तरह से प्रभावित कर सकते हैं.
भारत चीन पर ज्यादा असर
अध्ययन में साफ तौर पर कहा गया है कि भारत और चीन जैसे गेहूं उत्पादक देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा. अध्ययन के प्रमुख लेखक एरीन कॉगलेन डि पेरेज का कहना है कि जिस तरह की ग्रीष्म लहरें 1981 में चली थीं जो पहले हर सौ सालों में एक बार देखने को मिलती थीं, ज्यादा दिखेंगी.
अब और ज्यादा आएंगी भीषण ग्रीष्म लहरें
एरीन ने बताती है कि इस तरह की ग्रीष्म लहरें मध्य पश्चिमी अमेरिका में हर छह साल में और उत्तर पूर्वी चीन में हर 16 साल में देखने को मिलेंगी. ये ऐसे हालात का अनुमान हैं जिनके लिए हमें तैयारी करनी होगी. जबकि अभी तो हमने उन्हें अनुभव भी नहीं किया है. ऐतिहासिक रिकॉर्ड अब बिलकुल ऐसा नहीं रह गया है जो भविष्य की स्थिति बता सके.
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Tags: Climate Change, Environment, Food, Global warming, India china, Research
FIRST PUBLISHED : June 11, 2023, 10:07 IST









