
कुंदन कुमार/गया. भारत में कई तरह की मिठाई मिलती है, लेकिन मिठाइयों की भीड़ में इमरती की एक खास जगह है. इमरती के बारे में कहा जाता है कि यूपी के जौनपुर से इसकी शुरुआत हुई है. वहां की इमरती पूरे देश में प्रसिद्ध है, लेकिन यही इमरती अब गया में भी बन रही है और इसका स्वाद लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है.
शहर के केपी रोड गांधी चौक के समीप श्री गणिनाथ इमरती भंडार है, जहां पर 20 वर्षों से इमरती बनाई जाती है. बड़े चाव से लोग इसे खाते हैं. इमरती को उड़द की दाल पीसकर और उसे घोलकर बनाया जाता है. पहले उड़द की दाल को पीसकर कुछ घंटों के लिए इसे फूलने के लिए छोड़ देते हैं, फिर इसे गोल गोल फूलों की आकृति में तेल में तला जाता है. फिर इसे चीनी की चाशनी में सोखने के लिए डाला जाता है. इसमें रंग लाने के लिए केसर या फूड कलर का प्रयोग किया जाता है.
260 रुपये किलो है रेट
गया शहर के गांधी चौक के समीप स्थित श्री गणिनाथ इमरती भंडार के दुकानदार महानंद प्रसाद बताते हैं कि इमरती को कम आंच में घी या रिफाइन में सेका जाता है. गया में इमरती की खूब डिमांड है. यहां से काफी दूर-दूर के लोग इमरती खरीदकर ले जाते हैं. रिफाइंड तेल में बनाई गई इमरती 260 रुपये प्रति किलो, जबकि शुद्ध देसी घी से बनी इमरती 450 रुपये प्रति किलो बेची जाती है.
50 साल पुराना स्वाद
गया में गिनी-चुनी जगह पर इमरती बनती है, जिसमें यह दुकान भी काफी प्रसिद्ध है. 20 साल से यहां पर इमरती बनाई जाती है. बताया कि गया में इमरती का स्वाद लगभग 50 साल से लोगों की जुबान पर है. जौनपुर से आए कारीगरों ने यहां पर इमरती बनाने की शुरुआत की थी. धीरे-धीरे गया के कुछ लोगों ने इसे सीखा और अब यहां इसे बनाया जाता है.
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FIRST PUBLISHED : May 28, 2023, 19:55 IST









