
नई दिल्ली. कोरोना या अन्य किसी वायरस की तुलना में निपाह वायरस की मृत्यु दर बहुत अधिक है, इसके संक्रमण को रोकने का कोई टीका नहीं है और न ही कोई इलाज है. इस जानलेवा वायरस से बचना हो तो चमगादड़ द्वारा काटे गए फलों को खाने से बचें. यह अलर्ट खासतौर पर केरलवासियों के लिए है तो वहीं दूसरी ओर आम लोगों के लिए यह खबर बेहद अहम है कि निपाह वायरस ने लोगों को संक्रमित करने का नया तरीका खोज लिया है. यह चेतावनी घातक निपाह वायरस के आगे के प्रकोप को रोकने के लिए है, जो अब चमगादड़ से सीधे मनुष्यों तक पहुंचने के लिए नए और चिंताजनक रास्ते ढूंढ रहा है. क्योंकि तेजी से शहरीकरण एक बार-दूरस्थ प्रजनन आधारों में आगे बढ़ता है.
2018 में, निपाह वायरस के कारण केरल निवासी मुथलिब के परिवार के 3 सदस्यों की मौत हो गई थी; जिसमें उनके पिता और दो भाई शामिल थे. उनके बड़े भाई सबित को बुखार, उल्टी, प्रलाप, कंपकंपी और तेज खांसी की शिकायत थी. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टरों को उनका रोग समझ में नहीं आया. उनकी मौत के बाद तक डॉक्टर्स के पास कोई जवाब नहीं था, और तब तक 22 और लोग निपाह वायरस से संक्रमित हो चुके थे. उनमें से केवल दो बच पाए. मुथलिब ने बताया कि उसके घर में अमरूद, आम और अन्य पेड़ थे, जिनके फल खाने के लिए चमगादड़ आया करते थे. जिन फलों पर चमगादड़ के काटे जाने का निशान होता था, उनमें से आम फल को तो फेंक देते थे, लेकिन अमरूद का वह हिस्सा अलग कर बाकी फल खा लेते थे, इसके कारण दो भाई और पिता इसके संक्रमण का शिकार बन गए.
लार, मूत्र, रक्त और नाक या सांस की बूंदें से भी हो सकता है संक्रमण
निपाह वायरस वाले तरल पदार्थों (लार, मूत्र, रक्त और नाक या सांस की बूंदें) के संपर्क में आने पर लोगों को संक्रमित कर सकता है. संक्रमण को रोकने के लिए न तो कोई टीका है, और न ही कोई ज्ञात इलाज है.
इसे जंगल में घूमने वाले सबसे खतरनाक रोगजनकों में से एक माना जाता है और यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की महामारी क्षमता वाले रोगजनकों की छोटी सूची में है. केरल स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि “निपाह से मृत्यु दर बहुत अधिक है, यह 70-100% है. और निपाह वायरस की मृत्यु दर कोविड से बहुत अधिक है.”
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Tags: Bats, Kerala News, Nipah virus, चमगादड़, निपाह वायरस
FIRST PUBLISHED : May 17, 2023, 05:30 IST








