छात्रों ने देखा ‘परीक्षा पर चर्चा का सीधा प्रसारण

♦पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय मनौरी में सोमवार को प्रिंसिपल-अभिभावक संवाद के बाद विद्यार्थियों को दिया गया एडमिट कार्ड

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से परीक्षा के तनाव को कम करने के उपायों पर चर्चा की। जिसका पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय मनौरी में सभी छात्र एवं छात्राओं को सीधा प्रसारण दिखाया गया। सोमवार को विद्यार्थियों ने परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम को देखकर आगामी परीक्षा को तनाव मुक्त ढंग से देने का संकल्प व्यक्त किया।

पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय मनौरी के प्रधानाचार्य मनीष कुमार त्रिपाठी ने बताया कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में उत्साह, संबल और आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला है। प्रधानमंत्री का आत्मीय वार्तालाप विद्यार्थियों की झिझक दूर करने वाला तथा आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है। इस कार्यक्रम से निश्चित ही विद्यार्थी तनाव मुक्त होकर परीक्षा में भाग लेंगे। प्रधानाचार्य ने कहा कि परीक्षा के समय में बच्चों को तनावमुक्त रखने के लिए अभिभावक व शिक्षक उनसे मित्रवत व्यवहार करें। प्यार से उनकी समस्याओं का निराकरण करने का प्रयास करें। बच्चों का हौसला बढ़ाएं और उन्हें यह समझाने का प्रयास करें कि सभी विषयों का नियमित अध्ययन करें। ईमानदारी से मेहनत करेंगें तो परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त होंगे। 10वीं एवं 12वीं की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 15 फरवरी से प्रारंभ हो रही है। परीक्षा निकट है। ऐसी परिस्थिति में बच्चे तनाव में आ जाते है। बच्चों से कहा कि वे रूटीन बनाकर सभी विषयों का रिवीजन करें। कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान दें। खासकर गणित, अंग्रेजी एवं विज्ञान में विशेष ध्यान दें। मानसिक तनाव में न रहें। लगन एवं मेहनत से पढ़ाई करने पर अच्छे अंक प्राप्त होंगे। उन्होंने परीक्षा की अवधि में व्यक्तिगत सुख-सुविधा, खेलकूद को नजरअंदाज करते हुए पढ़ाई करने का सुझाव दिया है।

अभिभावक बच्चों को सिखाएं कि परीक्षाएं जीवन का लक्ष्य नहीं

प्रधानाचार्य मनीष कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सामान्यत: परीक्षा के समय थोड़ा-बहुत तनाव विद्यार्थियों को अच्छा प्रदर्शन करने के लिए लगातार प्रेरित करने में मदद कर सकता है। लेकिन, अत्यधिक तनाव उनके शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ उनके संपूर्ण विकास पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकता है।

अभिभावक बच्चों के तनाव को समझें

विद्यार्थियों में परीक्षा तनाव के कई कारण हो सकते हैं। जैसे कि माता-पिता, शिक्षकों, सहपाठियों और परिवार के सदस्यों की अत्यधिक अपेक्षाएं, अन्य विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा, स्वयं बेहतर करने का दबाव और असफलता का डर। इसके अतिरिक्त अपर्याप्त तैयारी और समय प्रबंधन की कमी के कारण भी विद्यार्थी तनाव का अनुभव महसूस कर सकते हैं। प्राय: विद्यार्थी परीक्षा के तनाव के बारे में बात करने में असहज महसूस करते हैं। लेकिन माता-पिता उनके शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और व्यवहारगत संकेतों से उनके तनाव की पहचान कर सकते हैं।

खुद आदर्श बनें

प्रधानाचार्य मनीष कुमार त्रिपाठी ने अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि माता-पिता को बच्चों में स्वस्थ आदतों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। अच्छी आदतें तनाव को कम करने और ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकती हैं। माता-पिता अपने बच्चे को स्वस्थ भोजन करने, नियमित रूप से व्यायाम करने, नियमित योग करने और पर्याप्त नींद लेने के लिए प्रोत्साहित करें। एक अभिभावक के रूप में आप स्वयं भी इन आदतों को अपनाएं, ऐसा करने से बच्चों के सामने वह आदर्श होगा, जो उन्हें बनना चाहिए।

परीक्षाएं जीवन का लक्ष्य नहीं

परीक्षाएं ज्ञान को मापने का माध्यम हैं, न कि जीवन का अंतिम लक्ष्य। इसलिए माता-पिता द्वारा बच्चों को दिया गया भावनात्मक सहयोग और एक स्वस्थ और सौहार्दपूर्ण वातावरण परीक्षा की तैयारी के समय बच्चों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

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Author: Up Head Line

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