कौशांबी
अपर जिला जज फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम विष्णु देव सिंह ने महेवाघाट थाना क्षेत्र के अनधावां गांव में पांच वर्ष पूर्व हुई दहेज हत्या के एक मामले में पति को दोषी पाए जाने पर सात साल का कठोर कारावास व 21 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं आरोपी ससुर को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया है।
अभियोजन के मुताबिक पश्चिम शरीरा थाना क्षेत्र के कस्बा निवासी छोटे लाल की पुत्री रीना ने 22 अगस्त 2016 को गांव के ही शिव मंदिर में महेवाघाट थाना क्षेत्र के अनधावां निवासी सुनील कुमार के साथ प्रेम विवाह किया था। सजातीय होने के कारण वादी ने रीना को सुनील के साथ विदा कर दिया था। रीना जब मायके लौट कर आई तो बताया कि उसके पति व सास, ससुर दहेज में पल्सर बाइक, सोने की चेन व 50 हजार रुपये नकद की मांग कर रहे हैं। मारपीट करने का भी आरोप लगाया था। वादी ने रीना को समझा-बुझाकर सुनील के साथ विदा कर दिया था। 19 मई 2017 को वादी को सूचना मिली कि रीना की मौत हो गई है। जब वादी रीना की ससुराल पहुंचा तो वहां रीना घर के आंगन में मरी पड़ी थी और उसके शरीर में कई गम्भीर चोटें भी थी। मामले में छोटे लाल ने रीना के पति सुनील, ससुर पितम्बर व सास के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना के बाद पुलिस ने पति सुनील व ससुर पितम्बर के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया, और सास को क्लीन चिट दे दी। मुकदमे का विचारण अपर जिला जज फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम विष्णु देव सिंह की अदालत में किया गया। राज्य सरकार की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता पुरुषोत्तम लाल गुप्ता ने वादी समेत कुल सात गवाहों को कोर्ट में बुला कर गवाही कराई। दोनों ओर से दी गई दलीलों को सुनने व पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने पति सुनील कुमार को दहेज के लिए गर्भवती पत्नी की हत्या का दोषी पाते हुए सात साल का कठोर कारावास व 21 हजार रूपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थ दंड की आधी धनराशि वादी को दिलाए जाने का भी कोर्ट ने आदेश किया है।






