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पिपलिया मंडी में वह ऑडियो और वीडियो कैसेट में गाने भरने का काम करते थे. वीसीआर किराए से देते थे और अपना घर खर्चा चलाते थे. उनकी इच्छा थी कि उनके बच्चों की अच्छी पढ़ाई- लिखाई हो, इसके लिए उन्होंने मंदसौर शहर में आने का विचार किया. गिरधारीलाल के पिता किशन चंद जजवानी ने विरोध किया, लेकिन पिता के विरोध के बावजूद वे 1989 में मंदसौर आ गए. यहां आकर भी उन्होंने वीडियो लाइब्रेरी और घड़ी बेचने सुधारने का काम शुरू किया. धीरे-धीरे इनका व्यापार चल निकला और बच्चों की पढ़ाई लिखाई अच्छी हो गई और शादी भी अच्छी जगह हो गई. बड़ा बेटा बंटी इलेक्ट्रानिक्स का शोरूम चलाता है, जबकि छोटा बेटा कुमार इंजीनियर है.
Author: Jagran Times
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