स्टिंग प्रकरण में बढ़ सकती है हरीश रावत की मुश्किल, CBI ने 4 नेताओं को भेजे नोटिस, लिए जाएंगे वॉयस सैंपल

हाइलाइट्स

उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत स्टिंग केस में सीबीआई कोर्ट का बड़ा आदेश.
हरीश रावत समेत चार नेताओं को CBI ने भेजे नोटिस, वॉयस सैंपल लेने की तैयारी.

देहरादून. साल 2016 के बहुचर्चित स्टिंग ऑपरेशन मामले में सीबीआई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत, मदन सिंह बिष्ट और उमेश कुमार को नोटिस जारी कर आदेश दिए हैं. सीबीआई ने इन चारों नेताओं के वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी थी, जिस पर यह आदेश जारी किया गया है. विशेष न्यायधीश सीबीआई धर्मेंद्र सिंह अधिकारी की अदालत ने इस पूरे मामले की सुनवाई की.

आपको बता दें कि सीबीआई की तरफ से जांच अधिकारी सियाराम मीणा और सीबीआई इंस्पेक्टर सुशील कुमार वर्मा किया ने अदालत में प्रार्थना पत्र लगाया था. इसमें हरीश रावत हरक सिंह रावत उमेश कुमार और मदन सिंह बिष्ट के वॉयस सैंपल लेने की अनुमति के लिए अदालत से अनुमति मांगी गई थी. इस पर कोर्ट ने सुनाई करते हुए सभी के वॉइस सैंपल लेने की अनुमति दी है.

दरअसल, साल 2016 में हरीश रावत और के मुख्यमंत्री रहते हुए एक स्टिंग सामने आया था. स्टिंग करने का दावा उमेश कुमार ने किया था. जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में भी काफी हलचल देखने को मिली थी.. मामले में सीबीआई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत, विधायक मदन सिंह बिष्ट और विधायक उमेश कुमार को नोटिस जारी किया है.

क्या है यह मामला?
गौरतलब है कि वर्ष 2016 में हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए ये स्टिंग उस समय एक चैनल से जुड़े उमेश कुमार (वर्तमान निर्दलीय विधायक) ने जारी किया था. इस वीडियो में सीएम हरीश रावत पर सरकार बचाने के लिए विधायकों की सौदेबाजी करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे. इसके बाद एक और स्टिंग विधायक मदन सिंह बिष्ट का भी वायरल हुआ था. इसमें डॉ. हरक सिंह रावत के शामिल होने का दावा करते हुए हरीश रावत सरकार को बचाने के लिए खरीद-फरोख्त के आरोपों से जोड़ते हुए दिखाया गया था.

सीबीआई को मिला जांच का जिम्मा
यह स्टिंग भी उमेश कुमार की ओर से ही जारी किया गया था. बाद में इस मामले की जांच सीबीआई को दे दी गई थी. अब मामले की जांच इन चारों नेताओं के वॉयस सैंपल लेने पर टिकी हुई है, जिससे कि इनकी आवाज का मिलान स्टिंग में रिकॉर्ड हुई आवाज से किया जा सके. दोनों ही स्टिंग को लेकर उमेश कुमार ने दावा किया था कि हरीश रावत सरकार को बचाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त की डीलिंग की जा रही थी. स्टिंग में रुपयों के लेन-देन होने की बात का दावा भी किया गया था. इसके बाद प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा था.

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Author: Jagran Times

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