
परमजीत कुमार/देवघर. 29 जून से चातुर्मास शुरू हो रहा है. इससे साथ ही सारे मांगलिक कार्य वर्जित हो जाएंगे. यह चातुर्मास 4 माह का होने वाला है. आसाढ़ माह की एकादशी तिथि से कार्तिक माह की एकादशी तक चातुर्मास काल माना जाता है. बैद्यनाथधाम के ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, धार्मिक शास्त्र का मानना है कि ये चार महीने भगवान विष्णु निद्रा मुद्रा में चले जाते हैं. वहीं जितने भी साधु-संत है वे मौन हो जाते हैं और तीर्थ करने के लिए निकल जाते हैं.
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नन्दकिशोर मुदगल ने लोकल18 से कहा कि यह चातुर्मास 29 जून हरिशयन एकादशी से शुरू हो रहा है जो 23 नवंबर तक रहता है. चातुर्मास के दौरान साधु-संत मौन रहकर व्रत का पालन करते हैं. मौन रहकर तीर्थ करते हैं और व्रत-त्यौहार में गंगा स्नान करते हैं.
न करें मांगलिक कार्य
ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि हरिशयन एकादशी के बाद भगवान विष्णु निद्रा मुद्रा में चले जाते हैं. इसलिए इस दौरान घर पर किसी प्रकार का मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए. गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ, शादी-विवाह आदि मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं.
चातुर्मास में करें ये उपाय
अगर आप नौकरी के लिए परेशान हैं तो चातुर्मास में छतरी, कपड़ा, अन्न और कपूर का दान जरूर करें. इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मांगी गई मन्नत जरूर पूरी करते हैं. वहीं गोदान करने से व्यापार में वृद्धि होती है और आर्थिक स्थिति अच्छी होती है.
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FIRST PUBLISHED : June 23, 2023, 08:47 IST






