अमेठी के ओमप्रकाश खुद से तैयार करते हैं आकर्षक खिलौने खुद का रोजगार शुरु कर बदल दी किस्मत

आदित्य कृष्ण/अमेठी. जीवन में कई मुसीबतें आती है कोई मुसीबतों से हार जाता है तो कोई उन मुसीबतों का डटकर मुकाबला करता है और आगे बढ़ जाता है. ऐसी ही कुछ कहानी है अमेठी के ओमप्रकाश की. ओम प्रकाश लेदर के खिलौने बनाने का काम करते हैं और इस व्यवसाय से उन्हें काफी फायदा होता है. कई वर्षों पहले इस काम को उन्होंने अपने जीवन के निजी कार्यों में उतारा और आज इसी व्यवसाय से ओमप्रकाश अपने परिवार को आगे बढ़ा रहे हैं और अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे है.

दरअसल, जामो विकासखंड के धर्मागतपुर के रहने वाले ओम प्रकाश ने आठवीं तक की पढ़ाई की है. ओमप्रकाश के पिता किसान थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा ठीक नहीं थी 18 साल की कम उम्र में ही ओमप्रकाश के पिता का मृत्यु हो गई. जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारियां ओमप्रकाश के सर पर आ गई. ऐसे में 1984 में इन्होंने इंदौर शहर जाकर लेदर के खिलौने बनाने का काम सिखा करीब 16 साल तक लगातार काम सीखने के बाद वापस घर आए ओमप्रकाश ने इस व्यवसाय को यहीं पर शुरू करने की ठान ली और 2016 में उन्होंने अमेठी जनपद में इस काम को शुरू कर दिया.

पेपर, लेई तार पुवाल और लेदर से तैयार होता है खिलौना

ओमप्रकाश द्वारा तैयार किया गया खिलौना पिसे हुए पेपर लेई तार पैरे और लेदर मिलाकर तैयार होता है. आपको बता दें कि 1 महीने में यह सैकड़ों पीस खिलौने तैयार करते हैं और न्हें बाजारों में बेचते हैं. खास बात यह है कि खिलौनों में लगने वाले सामान इंदौर में ही उपलब्ध हो पाते हैं और जब खिलौने बनाने के लिए सामान की जरूरत होती है तब अमेठी से ओमप्रकाश इंदौर तक का सफर तय करते हैं.

कोरोना में ठप हो गया था व्यवसाय फिर भी नहीं मानी हार

आपको बता दें कि ओमप्रकाश द्वारा 2016 में शुरू किया व्यवसाय कोरोना के समय में पूरी तरीके से ठप हो गया था और करीब 2 वर्षों तक व्यवसाय ठप था. लेकिन उसके बाद भी ओमप्रकाश ने हार नहीं मानी और लगातार अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष करते रहे.

सुनिए ओमप्रकाश की जुबानी

न्यूज 18 लोकल से खास बातचीत में ओमप्रकाश कश्यप ने बताया कि वह 1984 से इस काम को कर रहे हैं. 1984 से वर्ष 2 हजार तक इस काम को उन्होंने सीखा, फिर 2016 में अपने गृह जनपद में इसकी शुरुआत की और आज व्यवसाय से अच्छा खासा मुनाफा हमें हो रहा है. खेती किसानी उतना फायदा नहीं होता था और इस व्यवसाय से हमें काफी फायदा हो रहा है. दूर-दूर से लोग हमारे खिलौने खरीदने के लिए आते हैं. अन्य लोगों को भी हमने रोजगार दिया है.

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Author: Jagran Times

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