
हिमांशु नारंग/करनाल: बच्चों की याद आई तो रुंध गया गला, थम गई जुबां, चेहरे पर दिखी दर्द भरी दास्तां, कुछ इस तरह से करनाल के निर्मल धाम में अपनी आंखों को नम करते हुए अपने बेटे-बेटियों को याद कर रहे हैं बुजुर्ग. आज फादर्स डे है, लेकिन यहां के सैकड़ों बुजुर्गों के लिए पिता दिवस कोई मायने नहीं रखता और न ही वे उसे याद करना चाहते हैं, क्योंकि अब उनके अपने ही उनका साथ छोड़ गए हैं.
इस दुनिया में सब कुछ होते हुए भी ये बुजुर्ग अकेले जीवन जीने पर मजबूर हैं और वृद्ध आश्रम में रहने को विवश हैं. बुजुर्गों का यह अकेलापन दूर करने के लिए बाबा संत अमरीक सिंह ने करनाल में निर्मल धाम नाम से एक वृद्ध आश्रम बनाया है, जिसमें इस समय करीब 100 से अधिक बुजुर्ग रहते हैं. बच्चों ने अपने माता पिता को अपने हाल पर छोड़ दिया है. हालांकि, निर्मल धाम में उन्हें हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध हैं, बावजूद इसके वे अपनों को नहीं भूल पाए.
कभी कोई परिवार का सदस्य मिलने आ जाए तो उनके चेहरे पर रौनक लौट आती है और खुश हो जाते हैं, लेकिन उनके जाते ही फिर से वे उदासी के साए में खो जाते हैं. इन बुजुर्गों ने शायद इसे ही अब अपना जीवन मान लिया है. इतने दुख सहने के बाद भी बुजुर्गों के मुंह से बच्चों के बारे में बुरे शब्द नहीं निकलते, निकलती है तो सिर्फ बच्चों के लिए दुआ. कहते हैं शायद यही उनकी नियति है.
मिलने आते हैं, पर घर नहीं बुलाते
निर्मल धाम में दिल्ली के रहने वाले बुजुर्ग ने कहा कि आश्रम में रहते हुए 12 साल से अधिक हो गए हैं. उन दिनों मेरी हालात खराब थी, बीमार था. परिवार के लोग मारते पीटते थे. फिर मुझसे कहा गया कि करनाल के निर्मल धाम आश्रम में चले जाओ. बुजुर्ग ने दिल पर पत्थर रखते हुए कहा कि अब मुझे परिवार की याद नहीं आती. मेरा कोई सहारा नहीं है. वहीं एक अन्य बुजुर्ग ने कहा कि मजबूरी में आश्रम में रहना पड़ रहा है. परिवार वाले कहते हैं कि कमा कर लाओ, 78 साल की उम्र है, अब काम नहीं होता. परिवार की जरूरत तो महसूस होती हे, लेकिन क्या करें. मिलने के लिए पोता-पोती आ जाते हैं, परिवार के लोग भी आते हैं, लेकिन कोई नहीं कहता कि मिलने के लिए घर आ जाओ.
जब से यहां आया किसी ने फोन नहीं किया
75 वर्षीय मोहन लाल ने बताया कि घर के हालात ऐसे हो गए थे कि जिनकी वजह से यहां पर आना पड़ा. घर में इज्जत नहीं थी. कहा मेरे बच्चे पैदा हुए तो मैंने बहुत खुशियां मनाई थी, लेकिन छोटे बच्चे को क्या पता होता है कि मां-बाप ने उनके लिए क्या किया है. शायद मैंने ही कुछ गलत किया होगा तभी अपनों से दूर रहना पड़ रहा है. ये कहते ही मोहन लाल भावुक हो उठते हैं. कहा, मैं पिछली बातों को याद करके दुखी नहीं होना चाहता. परिवार में से किसी ने भी आज तक फोन नहीं किया.
यहां बुजुर्गों को कोई तकलीफ नहीं
निर्मल धाम आश्रम के मैनेजर ने बताया कि इस आश्रम को संत अमरीक देव जी ने बनाया है. यहां पर सौ से अधिक बुजुर्ग रहते हैं. किसी से कोई चार्ज नहीं लिया जाता. बुजुर्ग यहां पर काफी खुश रहते हैं. उन्हें यहां पर अपने हमउम्र मिल जाते हैं. कई बार बच्चों को लगता है कि उनसे गलती हो गई है, वे बातचीत करके अपने मां- बाप को यहां से ले जाते हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 18, 2023, 21:53 IST






