
राजकुमार सिंह/ वैशाली.जैसे पालतू जानवरों से उसके मालिक को लगाव हो जाता है, ठीक वैसा ही लगाव पालतू जानवरों को भी उसके मालिक से होता है. यही कारण है कि अक्सर जब उन दोनों में से किसी एक की भी मौत हो जाती है, तो दूसरे को गहरा सदमा पहुंचता है. ऐसा ही कुछ वैशाली एक्सप्रेस के नाम से धूम मचा चुके एक घोड़े के साथ हुआ. अपने मालिक की मौत के 2 महीने तक वह खूब रोता रहा. ठीक से खाना भी नहीं खाता था. स्थिति यह हो गई थी कि घोड़े की रस्सी भी खोल दी गई थी, लेकिन वह कहीं नहीं जाता था. बस मालिक की मौत का शोक मनाता रहता था. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं वैशाली एक्सप्रेस की पूरी कहानी.
वैशाली जिले के सेंदुआरी गांव में वैशाली एक्सप्रेस नाम का मशहूर घोड़ा है. उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और कोलकाता तक घुड़सवारी में यह अपने नाम का डंका बजवा चुका है. रेस में कई खिताब जीत चुका है. पिछले दिनों उसके मालिक अखिलेश कुमार कुशवाहा का का जब निधन हुआ, तो इस घोड़े ने घर में खाना-पीना छोड़ दिया. दो माह तक हमेशा रोते हुए नजर आया. स्व. अखिलेश कुशवाहा के बेटे श्याम कुशवाहा ने बताया कि यह घोड़ा उसके घर8 साल से है. पापा की मौत के बाद घोड़ा दो माह तक रोते. खाना-पीना तक छोड़ दिया था. तब इस घोड़ा का रस्सी हम लोग खोल दिए थे. लेकिन यह कहीं नहीं जाता था.
नहीं बेचेंगे कभी घोड़ा
श्याम ने बताया कि पापा की मौत के बाद अब दो साल से इस घोड़ा की सवारी वह नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस घोड़ा का नाम वैशाली एक्सप्रेस इसलिए रखे थे कि अपने जिला का नाम रोशन हो. उन्होंने बताया कि मुजफ्फरपुर जिले के हरदी मेला में लगातार 3 सालों के विजेता है. इस घोड़ा को बचपन में ही हम लोगों ने खरीद लिया था. अभी इसकी कीमत 10 से 12 लाख रुपए है. ग्राहक आते हैं, लेकिन इसे हम नहीं बेचते हैं. यह मेरे पापा की निशानी है, इसलिए इसे हम कभी नहीं बेचेंगे.
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FIRST PUBLISHED : June 18, 2023, 21:30 IST






