3 साल की बेटी को हो रही थी उल्‍टियां, मां ने समझा वायरल इंफेक्‍शन, निकली दुर्लभ बीमारी


बच्‍चों को उल्‍टी, दस्‍त हो तो हम अक्‍सर नजरअंदाज कर देते हैं. घर में रखी दवाइयां देकर चुप हो जाते हैं. खुद से ही समझ लेते हैं कि वायरल इंफेक्‍शन होगा, कुछ दिनों में खुद ब खुद ठीक हो जाएगा. स्‍कॉटलैंड के रहने वाले स्‍कॉट और नताली बोल्‍टन ने भी यही लापरवाही की. नतीजा भयानक था. 3 साल की बेटी अवा में गर्मियों के दौरान अजीब लक्षण नजर आए. उल्‍ट‍ियां होने लगी. शरीर पीला दिखने लगा और वह सुस्‍त पड़ गई. दोनों को लगा कि नार्मल वायरल इंफेक्‍शन होगा. कुछ दिनों में ठीक हो जाएगा. मगर कुछ ही दिनों में बहुत बुरा होने लगा.

नताली ने बताया कि बेटी के पैरों में तेज दर्द होने लगा. वह कराहने लगी. उसकी आंखों के आसपास चोट के न‍िशान नजर आने लगे.हम घबरा गए और स्‍थानीय बाल रोग विशेषज्ञ के पास लेकर गए. उन्‍होंने देखते ही स्‍थानीय अस्‍पताल ले जाने की सलाह दी. वहां भी डॉक्‍टरों ने देखा लेकिन बीमारी पहचान नहीं पाए. कहा- खून में सफेद रक्‍त कोश‍िकाओं की संख्‍या कम होने की वजह से यह दिक्‍कत आ रही है. दवाइयां खिलाओ ठीक हो जाएगी. लेकिन जब खून के नमूनों की चांज हुई और सीटी स्‍कैन के नतीजे आए तो डॉक्‍टर भी हैरान रह गए. माता-पिता के सिर पर तो जैसे पहाड़ टूट पड़ा हो. उनकी 3 साल की बेटी में न्यूरोब्लास्टोमा का पता चला. यह स्‍टेज 4 कैंसर था.

क्‍या है बीमारी और इलाज
न्‍यूयॉर्क पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्षीय स्‍कॉट ने कहा-जब यह पता चला कि हमारी छोटी सी बच्‍ची को कैंसर है, हमारी तो पूरी दुनिया ही उजड गई. हम इसकी कभी कल्‍पना भी नहीं कर सकते थे. आप सोचिए मेरी बेटी कितनी मुश्क‍िल के दौर से गुजर रही है. मगर फ‍िर भी उसके चेहरे पर मुस्‍कान है. न्यूरोब्लास्टोमा अपरिपक्व तंत्रिका कोशिकाओं (Immature Nerve Cells) से विकसित होता है. यह कैंसर अधिकतर अधिवृक्क ग्रंथियों (Adrenal Gland) में और उसके आसपास उत्पन्न होता है, जो नर्व सेल्स के समान होते हैं. ज्‍यादातर 5 साल से कम उम्र के बच्‍चों में यह पाया जाता है और जेनेटिक म्‍यूटेशन इसकी प्रमुख वजहै. इससे ग्रसित 50 फीसदी बच्‍चे ही जिंदा रह पाते हैं. इसका इलाज सर्जरी से किया जा सकता है, लेकिन सबसे जरूरी है कि वक्‍त रहते इसका पता चल जाए. अगर यह ज्‍यादा फैल गया तो बचा पाना नामुमक‍िन है.

कई जगह फैल गया कैंसर
स्‍कॉट ने बताया कि इवा की पीठ पर सबसे पहले ट्यूमर बना. इसके बाद उसकी पिंडली, कूल्‍हे, पेल्‍व‍िश और शोल्‍डर में फैल गया.पता चला कि इसका लंबा उपचार चलेगा. ग्‍लासगो के रॉयल हॉस्पिटल में 6 चरणों की कीमोथेरेपी हुई. इससे पहले असंख्‍य परीक्षण और स्‍कैन से गुजरना पड़ा जिसमें पोकिंग और प्रोडिंग शामिल थी. बेटी को साइड इफेक्‍ट भी नजर और एक समय तो लगा कि शायद अब मुश्क‍िल हो जाएगी. लेकिन फ‍िर राहत भरी खबर आई. अभी इवा का 18 महीने और इलाज चलना है और इसके लिए ढेर सारा पैसा चाह‍िए. परेशान होकर स्‍कॉट ने ऑनलाइन लोगों से मदद मांगी. उन्‍हें 2.6 करोड रुपये की जरूरत है. स्‍कॉट ने लिखा, आगे बहुत कठ‍िन समय है. क्‍योंकि इस इलाज के बाद इम्‍यून सिस्‍टम उसका साथ छोड़ देगा, जिसका अर्थ है कि अब कोई भी वायरस आसानी से उसे अपनी चपेट में ले लेगा. इसलिए उसे 6 हफ्ते तक आइसोलेशन रूम में रखा जाएगा.

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Author: Jagran Times

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