Aastha : यहां शिवलिंग के रूप में भोलेनाथ ने पांडवों को दिए थे दर्शन, मंदिर में दर्शन करने से होता है पुत्र रत्न की प्राप्ति

क़ासिम ख़ान/नूंह. नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका शहर से तकरीबन चार – पांच किलोमीटर दूर अरावली पर्वत की वादियों में तकरीबन 5000 वर्ष पुराना झिरकेश्वर मंदिर अपनी भव्यता व दिव्यता के साथ-साथ अपने अंदर पौराणिक इतिहास को समेटे हुए है. पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां पर समय बिताया था. जानकार मानते हैं कि लाक्षागृह से निकलकर जब पांडव विराटनगर राजस्थान जा रहे थे तो इस जगह पर उन्होंने एक गुफा में समय बिताया था. यहां पर पांडवों ने महादेव की तपस्या की.महादेव ने शिवलिंग के रूप में पांडवों को दर्शन दिया. उस समय यहां पानी नहीं था तो पानी के लिए वरदान दिया. उसी समय से यहां पर ज़मीन से अपने आप पानी निकलता है और दूर तक बहता है.इसी पानी की वजह से पहाड़ में हरियाली ही हरियाली दिखाई  देती है. इसी पानी से धोबी समाज के लोग कपड़े धोकर अपनी आजीविका चलाते है.

झरने की वजह से ही फिरोजपुर झिरका शहर का नाम झिरका पड़ा. इतिहासकार बताते हैं कि सन 1876 में पंडित जीवन लाल शर्मा फिरोजपुर झिरका में अंग्रेजी हुकूमत के समय तहसीलदार थे, उन्हें सपने दिखाई दिया जिसमें कहा गया कि मैं यही विराजमान हूं. इसी सपने के आधार पर ब्राह्मण के नाते तत्कालीन तहसीलदार ने अपने कर्मचारियों से ख्वाब में आई जगह की खुदाई कराई, लेकिन 3 दिन की खोज के बावजूद भी कर्मचारी किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पाए. उसके बाद 8 – 10 दिन बाद फिर से तहसीलदार जीवनलाल को सपना आया और कहा कि जिस जगह पर पानी निकल रहा है, मैं वहां विराजमान हूं. कर्मचारी वहां पर पहुंचे तो उन्हें कुछ ग्वाले मिले वहां से अरावली पर्वत में एक गुफा दिखाई दी. जब वहां पहुंचे तो सपने में दिखी जगह वहीं पर मिली.

पंडित जीवन लाल शर्मा ने नौकरी से दे दिया था त्यागपत्र
वहां पर साफ – सफाई कराई गई और उसी स्थान पर महादेव विराजमान मिले. इसके बाद पंडित जीवन लाल शर्मा ने सरकारी नौकरी से रिजाइन कर दिया और यहीं पर कुछ समय बिताया. सबसे पहले पंडित जीवन लाल ने अपने निजी कोष से शिखर बनवाया. उनको कोई संतान नहीं थी. इस शिखर बनवाने के एक साल बाद उनको पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई. समय बीतता गया और मंदिर का प्रांगण बड़ा होता चला गया.

मंदिर के विकास के लिए 1970 में बना था ट्रस्ट
सन 1970 में फिरोजपुर झिरका शहर के लोगों के द्वारा एक ट्रस्ट बनाया गया, जिसमें मंदिर की देखरेख से लेकर उसके विकास पर ध्यान दिया. पिछले करीब 18 सालों से फिरोजपुर झिरका शहर के अनिल गोयल शिव मंदिर विकास समिति फिरोजपुर झिरका की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. 17 सदस्य उनकी हर प्रकार की मदद करते हैं.हर सोमवार को यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं. साल में दो बार महा शिवरात्रि और शिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेला इस मंदिर परिसर में लगता है, जहां हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आकर मन्नत मांगते हैं.

भक्तों पर बरसती है महादेव की कृपा
मंदिर समिति प्रधान अनिल गोयल का कहना है कि जिन को पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं होती या बच्चों की शादी वगैरह नहीं होती. ऐसे लोग बड़ी संख्या में आकर यहां मन्नत मांगते हैं और यहां पर पूजा-अर्चना करने से उनकी मन्नत पूरी हो जाती है.ऐसा लोगों का मानना है इसीलिए यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. सबसे ख़ास बात यह है कि इस मंदिर परिसर में सैकड़ों बंदर हैं और मधुमक्खी के दर्जनों छत्ते हैं, लेकिन सैकड़ों वर्षो से यहां एक खासियत रही है कि आज तक मधुमक्खियों व बंदरों ने किसी पर हमला कर घायल नहीं किया है. कुल मिलाकर यहां महादेव की कृपा हर समय बरसती रहती है.

नेताओं का लगा रहता है तांता
झिरकेश्वर मंदिर का इतिहास बेहद पौराणिक है. पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल ने सबसे पहले इस मंदिर परिसर में पानी की कमी को दूर करने के लिए बोरवेल लगवाया था. पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल ने महज 3 दिन में चार-पांच किलोमीटर दूरी पर फिरोजपुर झिरका से बिजली की व्यवस्था मंदिर परिसर में कराई थी. पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला या फिर मौजूदा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सभी ने इस मंदिर समिति की किसी न किसी रूप में मदद जरूर की है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, हरियाणा सरकार में दिग्गज मंत्री राव नरबीर सिंह जैसे कई राजनेता अपने चुनावी अभियान की शुरुआत यहां से कर चुके हैं.यहां पूजा अर्चना करने के बाद न केवल कई लोग प्रदेश के मुख्यमंत्री बने बल्कि कुछ लोगों को राजनीति में अहम मुकाम मिला.यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मुराद पूरी होती है.

कोविड काल में किया वृक्षारोपण
कोरोना काल में जब लोग एक तरह से घरों में कैद हो गए थे तो शिव मंदिर विकास समिति के प्रधान अनिल गोयल उनके साथी मनोज गोयल एडवोकेट एवं अन्य लोगों ने मंदिर परिसर में वृक्षारोपण किया, ना केवल वृक्षारोपण किया बल्कि इन पौधों को बच्चों की तरह पालने के लिए हर कोशिश की. यही वजह है कि आज अरावली पर्वत में झिरकेश्वर शिव मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में हरे भरे वृक्ष हैं. यह पूरी तरह से मन को शांति मिलती है. कुल मिलाकर पांडव कालीन झिरकेश्वर मंदिर में न केवल श्रद्धालुओं की मुराद पूरी होती है बल्कि इलाके के लोग एक पर्यटक स्थल के रूप में भी यहां भ्रमण करने के लिए जाते हैं.

Tags: Dharma Aastha, Local18, Religion 18

Source link

Jagran Times
Author: Jagran Times

Leave a Comment

Read More