NEET UG Result: नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली, मेलघाट के 16 छात्रों ने पास किया NEET, ऐसे हासिल किया ये मुकाम

NEET UG Result: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और मेलघाट के दूरदराज के गांवों के 16 छात्रों ने NEET 2023 की परीक्षा पास की है. NEET 2023 पास करने के साथ ही अब उनका डॉक्टर बनने का सपना पूरा होने के करीब है. नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पूरे भारत में MBBS (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) और BDS (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) कॉलेजों में प्रवेश के लिए सिंगल एंट्रेंस एग्जाम है.

विदर्भ क्षेत्र के ये उम्मीदवार उन 30 छात्रों का हिस्सा थे, जिन्हें पुणे में बीजे मेडिकल कॉलेज के छात्रों और पूर्व छात्रों द्वारा स्थापित एक संगठन ‘लिफ्ट फॉर अपलिफ्टमेंट’ (LHU) द्वारा दो साल के लिए मुफ्त कोचिंग दी गई थी. पीटीआई के अनुसार गढ़चिरौली और मेलघाट अक्सर नक्सलवाद प्रभावित और सामाजिक तौर पर पिछड़ा हुआ क्षेत्र हैं. इन क्षेत्रों छात्रों को डॉक्टरों और पुणे मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करने वालों द्वारा पढ़ाया जाता था. मेंटर उस्मानाबाद और गचिरोली जिलों में संगठन के अध्ययन केंद्रों का दौरा करते थे.

गढ़चिरौली जिले के एट्टापल्ली ताकुला के चंदनवेली गांव के तरंग वैरागड़े ने शेयर किया कि उन्होंने NEET 2023 में 720 में से 501 अंक प्राप्त किए हैं. 18 वर्षीय अपनी दादी और मां के साथ रहता है, जो खेत पर काम करती है और गुज़ारा करने के लिए सिलाई करती हैं. तरांग वैरागड़े, जिन्होंने बचपन में अपने पिता को खो दिया था, उन्होंने कहा कि उन्होंने स्थानीय स्कूलों में जाकर एक शिक्षक से LFU की मुफ्त कोचिंग के बारे में सीखा. उन्होंने बताया कि उसे ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन कोचिंग भी मिली. मेंटर्स ने उनके बेसिक्स क्लियर किए और उनकी अंग्रेजी सुधारने में मदद की.

वैरागड़े MBBS कोर्स में प्रवेश पाने की आस लगाए बैठे हैं. उन्होंने कहा, “मैं मेडिकल एजुकेशन के बाद अपने मूल स्थान पर लौटना चाहता हूं और यहां के लोगों की सेवा करना चाहता हूं।” गढ़चिरौली के गावधेट्टी गांव के आकाश कोडयामी (18) ने 720 में से 464 अंक हासिल किए हैं. कोडयामी, जिनका परिवार खेती में है, एक स्थानीय राज्य संचालित ‘आश्रम शाला’ गए और एक दोस्त ने उन्हें मुफ्त कोचिंग संस्थान के बारे में बताया.

आदिवासी बच्चों ने कहा कि वे गोंडी भाषा बोलते हैं और उन्हें अंग्रेजी सीखने में परेशानी होती है. लेकिन LFU द्वारा बनाई गई एक डिक्शनरी, जिसमें गोंडी शब्दों का अंग्रेजी में अनुवाद किया गया था. इस डिक्शनरी ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया. मेडिकल सीट की उम्मीद कर रहे कोडयामी ने कहा, “गुरुओं ने मुझे बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ NEET की तैयारी में मदद की.” वैरागड़े की तरह, वह भी शिक्षा पूरी करने के बाद अपने लोगों की सेवा करना चाहता है.

एक विज्ञप्ति में, LFU के सह-संस्थापक डॉ केतन देशमुख ने कहा कि मेडिकल प्रवेश कोचिंग करोड़ों रुपये के उद्योग में विकसित हो गई है, लेकिन हर कोई फीस चुका पाने में सक्षम नहीं हैं. उन्होंने कहा, “हम किसी भी व्यक्ति के लिए एक निष्पक्ष और सुलभ मंच देना चाहते हैं, जो डॉक्टर बनना चाहते हैं और उपेक्षित और वंचित पृष्ठभूमि से आते हैं. एक प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार के बाद हम कोचिंग के लिए छात्रों का चयन करते हैं.”

गढ़चिरौली जिले के भामरागढ़ में विदर्भ क्षेत्र के लिए संगठन का एक विशेष बैच है. देशमुख ने कहा, “हर हफ्ते डॉक्टर और सीनियर मेडिकल छात्र लेक्चर देने के लिए भामरागढ़ आते हैं, जबकि कुछ लेक्चर ऑनलाइन दिए जाते हैं.” इस साल के NEET के नतीजों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘इन 16 छात्रों से कम से कम 16 गांवों का उत्थान हुआ है. अगले दस वर्षों में हम चाहते हैं कि गढ़चिरौली और मेलघाट के 100 आदिवासी छात्र डॉक्टर बनें.” उन्होंने कहा कि उनके द्वारा प्रशिक्षित कई छात्र अब मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे हैं और कुछ LFU में टीचिंग फैकल्टी के रूप में भी शामिल हो गए हैं.

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Tags: NEET, Neet exam

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Author: Jagran Times

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