इस इत्र की खुशबू है सोने की चमक पर भारी, कीमत सुनकर हो उड़ जाएंगे होश

अंजली शर्मा/कन्नौज. कन्नौज के इत्र उद्योग में अपना प्रमुख स्थान बना चुके बेला के इत्र की देश के साथ-साथ विदेशों में भी अच्छी खासी मांग रहती है. बेला इत्र की एक मुख्य खासियत यह है कि यह सिर्फ कन्नौज में ही बनाया जाता है. इसका रेट ₹600 किलो से लेकर 9 लाख रुपए किलो तक जाता है. यह इत्र आर्डर पर तैयार किया जाता है, जैसी शुद्धता उसी हिसाब का रेट लगता है.

बेले के फूल दोपहर 3:00 बजे के बाद पेड़ों से उतारे जाते हैं. इसके बाद करीब शाम 7 से 8 तक यह इत्र के कारखानों में पहुंचते हैं. जहां पर सारी विधियों से होते हुए इत्र बनता है.

आज के आधुनिक समय में भी कन्नौज में इत्र भट्टियों में ही एक बड़े से डेग में बनाया जाता है. यह डेग एक बड़े से तांबे के पात्र जैसा होता है. जिसमें बेला के फूलों को डाला जाता है. तांबे के पात्र में पानी भरकर उसे भट्टी पर चढ़ा दिया जाता है. जिसके बाद तेज आंच पर आने के बाद उसका वाष्पीकरण होता है और एक छोटे से बर्तन में वह इतर इकट्ठा हो जाता है.

कड़ी मेहनत से बनता है इत्र

चंद्रबली एंड संस में इत्र बनाने वाले कारोबारियों ने बताया कि बेला का इत्र बनाने में काफी कड़ी मेहनत लगती है. तांबे के बड़े से डेग में पहले फूलों को डाला जाता है और फिर उस डेग में पानी डाला जाता है. कई और विधियां पूरी करते हुए उसको बंद किया जाता है. जिसमें चिकनी मिट्टी का भी प्रयोग होता है. जिसके बाद इस डेग को कड़ी आंच के ऊपर तपाया जाता है. फिर फूल का वाष्पीकरण करके इसका इत्र बनाया जाता है, जो कि पूरे देश के साथ-साथ विदेशों में भी जाता है.

कन्नौज में मिलता है सबसे अच्छा बेला का फूल

इत्र व्यापारी आलम बताते हैं कि कन्नौज में ही सबसे अच्छा बेला का फूल होता है, बेला का फूल मुख्यता शाम को उतारा जाता है, और रात में इसका इत्र बनाया जाता है. यह इत्र आर्डर पर तैयार किया जाता है, जैसी शुद्धता उसी हिसाब का रेट लगता है. देश के साथ-साथ विदेशों में भी बेला के इत्र की अच्छी खासी मांग रहती है.

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