
विक्रम कुमार झा/पूर्णिया. योगिनी एकादशी का खास महत्व है. पूर्णिया के पंडित मनोत्पल झा ने बताया कि योगिनी एकादशी हो, देवशयनी एकादशी हो या फिर देवोत्थान एकादशी इन सभी का अलग-अलग महत्व है. इसमें योगिनी एकादशी का खास महत्व है. इस बार योगिनी एकादशी 14 जून को है. इसमें भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की पूजा आराधना विशेष रूप से की जाती है. अगर दस महाविद्या की बात करें तो उसमें 1 महाविद्या योगिनी है, जिसमें मां के नौ रूपों में पूजा होती है.
पूर्णिया के पंडित मनोत्पल झा ने बताया कि साल में 24 एकादशी और मलमास के कारण 26 एकादशी होती हैं, लेकिन साल की अंतिम एकादशी से पहले की एकादशी योगिनी एकादशी होती है. इसका खास महत्व है. इस बार योगिनी एकादशी 14 जून (बुधवार) को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि को मनाई जाएगी.
आम लोगों की जिंदगी में इन दो योगिनी से होती परेशानी
पंडित मनोत्पल झा के मुताबिक, ज्योतिष शास्त्र में अगर देखा जाए तो 8 योगिनी का ज्यादा महत्व दिया गया है, जिसमें संकटा और उल्का लोगों के दिशा-दशा, दिशा-अंतर्दशा में उतार-चढ़ाव करने का काम करती हैं. इस कारण संकटा और उल्का दोनों बहुत ज्यादा कष्टदायक होती हैं. इसलिए जन्म के समय लोगों की दिशा और दशा देखकर योगिनी दशा चल रही है कि नहीं, इसका विशेष ध्यान रखा जाता है.
सभी असाध्य रोगों एवं अन्य समस्याओं से मिलेगी मुक्ति
पंडित मनोत्पल झा ने बताया कि योगिनी एकादशी व्रत के दिन आप नहाकर भगवान विष्णु और लक्ष्मी की सच्चे मन के साथ पूजा पाठ करें, तो कई बीमारियों से राहत मिलेगी. इसके साथ-साथ कष्ट, दुख, दर्द, मानसिक तनाव, मानसिक चिंताएं सब से छुटकारा मिलेगा. साथ ही बताया कि मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा आराधना करने से आपके आस-पास भटकने वाले नकारात्मक शक्तिया से छुटकारा मिलेगा.
इन उपायों को करने मिलेगा अधिक लाभ
पंडित मनोत्पल झा ने बताया कि योगिनी एकादशी व्रत के दिन भक्त सुंदरकांड का पाठ और श्री सत्यनारायण स्वामी की पूजा करें, इससे ज्यादा से ज्यादा लाभ होगा .
.
FIRST PUBLISHED : June 13, 2023, 11:21 IST






