Success Story : कौन हैं अफरीद अफरोज, जो बने बेस्ट एयरफोर्स कैडेट, NDA टॉप कर जीता प्रेसिडेट गोल्ड मेडल

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Success Story Of NDA Topper Afrid Afroz : लाखों युवक राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खड़कवासला, पुणे में कैडेट बनने के सपने देखके हैं. युवक एनडीए में कैडेट के रूप में भर्ती होते हैं और भारतीय सना के ऑफिसर बनकर निकलते हैं. इस साल एकेडमी में पटियाला के एक लड़के को वायु सेना कैडेट घोषित किया गया. साथ ही उसने ओवरऑल पहला स्थान हासिल करने के लिए प्रेसिडेंट गोल्डेन मेडल भी हासिल किया. यह शानदार उपलब्धि हासिल करने वाले एनडीए कैडेट हैं 21 वर्षीय अफरीद अफरोज.

अफरोज ने सातवीं कक्षा तक पढ़ाई पटियाला के एक स्कूल में की. इसके बाद उनका दाखिला राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (RIMC) में कराया गया. यहां उन्होंने पढ़ाई के साथ लीडरशिप सहित वह स्किल हासिल की जो एक आर्मी ऑफिसर में अपेक्षा की जाती है. राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज अपनी इसी खूबी के लिए जाना भी जाता है. राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में एनडीए में जाते हैं.

आठवीं क्लास में चले गए थे राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज

अफरीद अफरोज के पिता उनकी उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहते हैं, अफरोज आठवीं कक्षा में राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज में प्रवेश पाने में कामयाब रहे थे. अफरोज अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं. वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हुए कहते हैं कि मेरे माता-पिता ही सबसे बड़े सहारा रहे हैं. उन्होंने ही हमेशा सपने पूरे करने के लिए प्रेरित किया है.

पिता थे पंजाबी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर

अफरोज के पिता हबीब पंजाबी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रह चुके हैं. वह इस समय मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी,हैदराबाद में काम करते हैं. वह कहते हैं कि उनके बेटे को कड़ी मेहनत और देश सेवा का जुनून है. जिसके चलते उसने सफलता पाई. मेरे पास यह बताने के लिए शब्द नहीं है कि जब पसिंग आउट परेड में मेरे बेटे को राष्ट्रपति मेडल से सम्मानित किया गया तो कितना गर्व महसूस हुआ. अफरोज के पिता प्रोफेसर हबीब और उनकी मां जुबैदा ने मंगलवार को पुणे में पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया था.

सातवीं क्लास में ही तय कर लिया था सेना में जाने का लक्ष्य

अफरोज की शुरुआती स्कूलिंग (पहली से छठवीं तक) सेंट मैरी स्कूल, सनौर, पटियाला में हुई. इसके बाद सातवीं कक्षा में वह आर्मी पब्लिक स्कूल पटियाला चले गए. जहां उनमें देश सेवा का बीज पड़ा. अफरोज कहते हैं कि मैनें आर्मी पब्लिक स्कूल पटियाला में सिर्फ एक साल बिताया. लेकिन वह एक साल मेरे जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. मैनें तय किया कि कुछ बड़ा करना है. वहां मैनें राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज, देहरादून और फिर एनडीए का सफर तय किया.

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Tags: Indian army, Job and career, Success Story

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Author: Up Head Line

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