बोकारो के भागलपुर होटल में मिलता है स्पेशल दही चूड़ा, खाने के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग  


कैलाश कुमार/बोकारो. बोकारो के चास मेन रोड स्थित भागलपुर होटल खास दही चूड़ा के लिए फेमस है. यहां लोग दूर-दूर से दही चूड़ा खाने के लिए आते हैं. भागलपुर होटल में ग्राहकों को नाश्ते के रूप में ठंडी दही चूड़ा परोसी जाती है. इसके अलावा यहां भोजन की सारी व्यवस्थाएं हैं. भागलपुर होटल के संचालक रवि राज ने लोकल 18 झारखंड से बातचीत में बताया कि उनके होटल का संचालन पिछले 30 वर्षों से किया जा रहा है. ग्राहकों को स्वादिष्ट भोजन और सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं.

यहां पर स्पेशल दही चूड़ा के अलावा नाश्ते में रोटी और सब्जी, दोपहर के वक्त शाकाहारी दाल भात और शाम के वक्त तड़का रोटी इत्यादि व्यंजन कि बिक्री की जाती है. यहां नाश्ते में ग्राहकों को खास दो वैरायटी के दही चूड़ा परोसा जाता है . पहला साधारण दही चूड़ा जिसकी कीमत 20 रुपए होती है. भागलपुर के स्पेशल कतरनी वाले दही चूड़ा की कीमत 50 रुपए है. यहां ग्राहकों को परोसी जाने वाली दही को ताजा गाय के दूध से जमा कर तैयार किया जाता है. फिर चूड़ा को अच्छे से धोकर ग्राहकों को परोसा दिया जाता है.

दही चूड़ा के अलावा होटल में 10 रुपए में सत्तू की रोटी और 40 रुपए में दाल चावल की स्पेशल थाली मिलती है. साथ ही ग्राहकों के फरमाइश पर उनके मनपसंद शाकाहारी भोजन ऑर्डर कर बनाने की भी सुविधा है. होटल के संचालक रवि राज ने बताया कि उनके होटल में रोजाना 100 प्लेट से भी अधिक दही चूड़ा की बिक्री होती है. वही उनका होटल रोजाना सुबह 7:00 बजे से लेकर रात के 10:00 बजे तक खुला रहता है. होटल पर दही चूड़ा खाने आए ग्राहक मोहम्मद शमशेर ने बताया कि यहां का दही चूड़ा बहुत ही टेस्टी है. गर्मियों में सुबह नाश्ते में दही चूड़ा खाने से दिन भर फुर्ती बनी रहती है.

.

FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 17:44 IST

Source link

Jagran Times
Author: Jagran Times

Leave a Comment

Read More

उत्तर प्रदेश के बांदा निवासी 9 वर्षीय पुत्र ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया 2 मिनट में 200 देश के झंडे पहचान कर बताने वाला पार्थ झा नमक बच्चों ने इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है माता-पिता वर्तमान में मुंबई में रहते हैं डॉक्टर जे विक्रम चाइल्ड स्पेशलिस्ट चाइल्ड केयर नर्सिंग होम के मालिक मामा है मामा जी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि उनका भांजा पार्थ झा ने 2 मिनट में 200 देश के फ्लैग पहचान कर बताने में महारत हासिल की है महाराष्ट्र राज्य में स्थित संस्था ने गोल्ड मेडल और एक प्रमाण पत्र दिया है इस वक्त उसका नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ़ रिकार्ड्स मैं दर्ज किया गया है भांजा और बहन पार्थझा मां जयश्री पिता अशोक झा बांदा के रहने वाले हैं हालांकि इसमें कोई शक नहीं है इतनी कम उम्र में 200 देश के झंडों का पहचान करना यह एक चमत्कार ही है दिमाग इस बच्चे का कंप्यूटर की तरह कार्य कर रहा है बांदा का लाल मुंबई में रहकर नाम पैदा कर रहा है सिर्फ बांदा भर का नहीं पूरे विश्व में भारत का नाम ऊंचा किया