महामारी की वजह से अंग्रेजों ने छोड़ा था करनाल, यहां पर 500 से अधिक कब्रें हैं गवाह

हिमांशु नारंग/करनाल: कोरोना महामारी को शायद ही कोई भूल पाएगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजादी से पहले भी ऐसी महामारी आई थी, जिसमें बहुत लोगों की जिंदगी खत्म हो गई थी. करनाल में एक ऐसा कब्रिस्तान है, जहां अंग्रेजों की कब्रें आज भी हैं, जो महामारी में मरे थे. दरअसल, करनाल में स्थित यह कब्रिस्तान ब्रिटिश काल का है. इसमें यूरोपीय सैनिकों को दफनाया गया था और साथ में एक चर्च टावर भी बनाया गया था.

करीब 8172 वर्ग मीटर के कब्रिस्तान में यूरोपीय सैनिकों और उनके परिवार के सदस्यों की 500 से अधिक कब्रें हैं. बताया जाता है कि ये सभी उस समय फैली मलेरिया और हैजा की महामारी के चपेट में आ गए थे. यह मकबरा समृद्ध औपनिवेशिक गोथिक वास्तुकला को दर्शाता है. करनाल में साल 1806 में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान एक छावनी बनी थी. साल 1842 तक कई यूरोपियन सैनिकों की मलेरिया और हैजा से मृत्यु हो गई थी.

बाद में सेना की छावनी को 1843 में अंबाला में स्थानांतरित कर दिया गया. क्षेत्र में मलेरिया के प्रकोप के पीछे पश्चिमी यमुना नहर प्रमुख कारण थी. ये नहर ब्रिटिश अधिकारियों की कॉलोनी (अब मॉल रोड) के पास से बहती थी. इसमें रिसाव के कारण मलेरिया महामारी बन गया था, जिससे उन्हें करनाल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा.

फिर अंबाला शिफ्ट हो गए अंग्रेज
जानकर बताते हैं कि सेना छावनी को अंबाला स्थानांतरित करने का पहला कारण मलेरिया था. दूसरा कारण अंग्रेजों को पंजाब पर नियंत्रण करना था और अंबाला इस उद्देश्य के लिए एक आदर्श स्थान था. साल 1806 में अंग्रेजों ने करनाल में एक सैनिक छावनी की स्थापना की थी. आधुनिक घरों, बैरक और शॉपिंग सेंटरों का निर्माण किया था. मलेरिया के प्रकोप के कारण, वे साल 1841 में अंबाला में स्थानांतरित होने लगे. साल 1843 में अंबाला में एक छावनी बन गई.

कब्रों पर सैनिकों के पदनाम
अंग्रेजी सैनिकों और उनके परिवार की 500 के लगभग कब्रें साल 1806 से 1843 के बीच की अवधि की हैं. सैनिकों के नाम उनके पदनामों के साथ कब्रों पर लिखे गए थे. करनाल में ब्रिटिश काल के कब्रिस्तान में स्थित क्रबों में से एक ब्रिटिश शासनकाल के दौरान भारतीय सेना के कमांडर-इन-चीफ जनरल एनसन की थी, जिनकी 27 मई, 1857 को हैजा से मृत्यु हो गई थी. बाद में, उनके परिवार के सदस्यों ने उनके शरीर को खोदकर निकाला और इंग्लैंड ले गए. फिलहाल कब्रिस्तान के अंदर जाने का रास्ता बंद है.

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FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 17:49 IST

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Author: Jagran Times

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