एक ही ट्रैक पर आ गई थी दो ट्रेन, दहशत फैली तो रेलवे ने की ये अपील…कहा डरें नहीं

सौरभ तिवारी/बिलासपुर. बीते दिनों जयरामनगर व कोटमी सोनार के बीच एक ही ट्रैक पर कोरबा मेमू व मालगाड़ी आ जाने से यात्री कुछ पल के लिए दहशत में आ गए. हालांकि मेमू ट्रेन खड़ी थी और यात्री नीचे उतर गए थे. यात्रियों को लगा कि बड़ा हादसा हो सकता है. एक ही ट्रैक में ट्रेन आते देख यात्रियों में डर की स्थिति बन गई. लोग ट्रेन से उतरने लगे और घटना का वीडियो बनाने लगे.

वहीं, रेलवे का कहना है कि यह सिस्टम का हिस्सा है. इससे कोई खतरा नहीं है. आटोमेटिक सिग्नल सिस्टम में दो से अधिक ट्रेनें एक ही ट्रैक पर कुछ अंतराल पर सुरक्षा के सारे मानदंडों के अनुसार चलती हैं. यह सेक्शन इस सिस्टम से लैस है. यह नजारा प्रतिदिन देखा जा सकता है. यात्रियों को बेवजह परेशान होने की जरूरत नहीं है.

यह था मामला
दरअसल, हुआ यह की इस सेक्शन में आगे बिलासपुर-कोरबा मेमू ट्रेन थी, इसके पहिए थमे तो यात्री नीचे उतर गए. उसी समय यात्रियों की नजर पीछे खड़ी मालगाड़ी पर पड़ी. यात्रियों को लगा कि मालगाड़ी पीछे से इतने पास आकर खड़ी हुई है. तब यात्री दहशत में आ गए और हैरान भी हो गए. वे यही समझने लगे कि बड़ा हादसा हो सकता था. कुछ यात्रियों ने इसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया. देखते ही देखते यह मामला आग की तरह फैल गया. हालांकि जब रेल प्रशासन तक पहुंचा तो उन्होंने इस मामले में स्पष्टीकरण जारी किया.

बिना नियम जानें वीडियो वायरल न करें
रेलवे का कहना है कि जयरामनगर व बिलासपुर सेक्शन ऑटोमैटिक सिग्नलिंग ब्लॉक सेक्शन है. रेलवे के सामान्य नियम के अनुसार जहां भी ऑटोमैटिक सिग्नलिंग ब्लाक सेक्शन हैं, वहां एक ही लाइन पर एक से अधिक गाड़ियों का सुरक्षित परिचालन एक ही समय में सिग्नल के आधार पर किया जाता है. इन दोनों ट्रेनों का भी परिचालन इसी नियम के अनुसार किया गया है. इस सेक्शन के अलावा भी अन्य रेलखंडों में जहां यह सिस्टम है, वहां परिचालन इसी नियम के अनुसार होता है. यात्री इस तरह की स्थिति में बिल्कुल भी न घबराएं. इसके अलावा बिना नियम या सिस्टम जाने वीडियो या फोटो वायरल न करें.

Tags: Bilaspur news, Chhattisgarh news, Indian Railways, Local18

Source link

Jagran Times
Author: Jagran Times

Leave a Comment

Read More

उत्तर प्रदेश के बांदा निवासी 9 वर्षीय पुत्र ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया 2 मिनट में 200 देश के झंडे पहचान कर बताने वाला पार्थ झा नमक बच्चों ने इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है माता-पिता वर्तमान में मुंबई में रहते हैं डॉक्टर जे विक्रम चाइल्ड स्पेशलिस्ट चाइल्ड केयर नर्सिंग होम के मालिक मामा है मामा जी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि उनका भांजा पार्थ झा ने 2 मिनट में 200 देश के फ्लैग पहचान कर बताने में महारत हासिल की है महाराष्ट्र राज्य में स्थित संस्था ने गोल्ड मेडल और एक प्रमाण पत्र दिया है इस वक्त उसका नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ़ रिकार्ड्स मैं दर्ज किया गया है भांजा और बहन पार्थझा मां जयश्री पिता अशोक झा बांदा के रहने वाले हैं हालांकि इसमें कोई शक नहीं है इतनी कम उम्र में 200 देश के झंडों का पहचान करना यह एक चमत्कार ही है दिमाग इस बच्चे का कंप्यूटर की तरह कार्य कर रहा है बांदा का लाल मुंबई में रहकर नाम पैदा कर रहा है सिर्फ बांदा भर का नहीं पूरे विश्व में भारत का नाम ऊंचा किया