बच्‍चे पैदा करना और भी आसान, आईवीएफ नहीं होगा फेल, साइंटिस्‍ट्स ने विक‍स‍ित की ऐसी तकनीक

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प्रेग्‍नेंसी अगर नेचुरल तरीके से न हो तो कई कपल आईवीएफ ट्रीटमेंट (ivf treatment)लेते हैं. कई बार यह आसानी हो जाता है लेकिन ज्‍यादातर मामलों में देखा गया है कि कपल को कई बार आईवीएफ ट्रीटमेंट लेना पड़ता है. यह काफी खर्चीला और पीड़ादायी होता है. साथ ही, सफलता की कोई गारंटी नहीं होती.क्‍योंकि अगर स्‍पर्म हेल्‍दी न हुआ तो प्रेग्‍नेंसी होगी भी तो नहीं टिकेगी. लेकिन अब साइंटिस्‍ट्स ने एक ऐसी तकनीक विकसित कर ली है, जिससे हेल्‍दी स्‍पर्म को ढूंढा जा सकेगा और उसी से कंसीव कराया जाएगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इससे आईवीएफ ट्रीटमेंट फेल होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी.

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, जो पुरुष हेल्‍दी फूड खाते हैं, रेगुलर एक्‍सरसाइज करते हैं, उनमें भी हेल्‍दी स्‍पर्म की संख्‍या सिर्फ 10 फीसदी होती है. यानी 10 में से केवल 1 शुक्राणु ही स्‍वस्‍थ होता है. तमाम पुरुषों में तो यह 4 फीसदी से भी कम होता है. ऐसे में इन स्‍पर्म से बच्‍चे पैदा होना बेहद मुश्क‍िल हो जाता है. कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने इसी संकट का समाधान ढूंढ निकाला है. ओमा क्लिनिक के साइंटिस्‍ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से एक ऐसा एल्‍गोरिदम बनाया है जो शुक्राणुओं को स्‍कैन कर हेल्‍दी स्‍पर्म का पता लगा लेगी. उन स्‍पर्म को तलाश लेगी जो फर्टिलाइजेशन के लिए सर्वश्रेष्‍ठ होंगे.

दर्द कम होगा और जेब पर बोझ भी कम
एआई को विकसित करने में मदद करने वाली बिजनेसमैन डॉ किरण जोशी ने बताया, अभी आईवीएफ ट्रीटमेंट लेने वाले हर कपल को कम से कम तीन बार इलाज से गुजरना पड़ता है. हम उस संख्या को कम करना चाहते हैं क्योंकि इससे दर्द कम होगा और जेब पर बोझ भी कम आएगी. रिसर्च से पता चलता है कि लगभग 40 प्रतिशत बांझपन के मामले पुरुषों की वजह से होते हैं. खराब लाइफस्‍टाइल, बेकार खानपान की वजह से स्‍पर्म की संख्‍या में लगातार गिरावट आ रही है. इसी समस्‍या को नया एल्‍गोरिदम दूर करेगा. हमने 1000 से अधिक पुरुषों के स्खलन से निकले शुक्राणुओं को स्कैन करने के बाद यह तकनीक विकस‍ित की है.

30 से 40 साल की उम्र वाले पुरुषों पर प्रयोग
वैज्ञानिकों ने बताया कि स्‍पर्म के नमूने पूरे अमेरिका और अन्य देशों में फर्टिलिटी क्लीनिक से लिए गए थे. इनमें ज्‍यादातर पुरुषों की उम्र 30 से 40 साल के बीच थी. कुछ ऐसे पुरुष भी थे, जिनकी आयु 75 वर्ष थी. हर नमून से स्‍पर्म का एक सेट तैयार किया गया, जिसमें 20000 स्‍पर्म थे. शीर्ष भ्रूणविज्ञानियों ने नमूनों का परीक्षण किया और जाना कि कितने स्‍पर्म हेल्‍दी हैं. उनकी गत‍ि कितनी है.क्‍योंकि ज्‍यादा गत‍ि वाले स्‍पर्म ही सफल होते हैं. वैज्ञानिकों ने पाया कि एक हेल्‍दी स्‍पर्म का सिर चिकना और अंडाकार होता है, और वह तेजी से एक सीधी रेखा में तैरने में भी सक्षम होता है. लेकिन इन्‍हें तलाशना अक्सर भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा होता है.

हेल्‍दी स्‍पर्म को एक अलग रंग में दिखा दिया
भ्रूणविज्ञानी डॉ. माइकल ग्वार्नाकिया ने कहा-हमने देखा कि कुछ स्‍पर्म इधर-उधर जा रहे हैं, यानी यह तरीका ठीक नहीं. इनसे फर्टिलाइजेशन होने की संभावना न के बराबर होती है. हमने हर नमूने का लगभग 10 सेकेंड का एक वीडियो भी तैयार किया. इसके बाद इसे एआई में डाला गया ताकि यह अनुमान लगाया जा सके कि कोई एक विशेष स्‍पर्म कितना स्वस्थ है. हम यह देखकर चक‍ित रह गए कि एआई ने हेल्‍दी स्‍पर्म को एक अलग रंग में कोड करके बता दिया. जो हरे रंग के स्‍पर्म थे. डॉक्‍टरों ने बताया कि यह चमत्‍कार‍िक पर‍िणाम थे.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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