
नई दिल्ली. भारतीय सुरक्षा बलों के सिक्योरिटी ग्रिड को तोड़ पाना अब पाकिस्तान (Pakistan) के लिए मुश्किल हो गया है. आतंकी घुसपैठ की कोशिशों में तो लगाम लगी ही है. साथ ही हथियार, ड्रग्स और जाली करंसी भी ज़मीन के रास्ते भारत में भेजे जाने की घटनाओं में कमी आई है. जब उसकी दिक़्क़तें बढ़ीं तो पाकिस्तान ने ड्रोन के ज़रिए ये काम शुरू किया. खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान ने भारत में हथियारों की तस्करी के लिए नेपाल के पुराने रूट को भी एक्टिव किया है. हालाँकि सूत्रों की मानें तो हथियार नेपाल के रास्ते आ भी गए तो उनका जम्मू पार कर कश्मीर तक पहुंचना ही सबसे मुश्किल होगा क्योंकि सुरक्षाबलों की नज़र जम्मू रूट से जाने वाली हर एक गाड़ी पर है.
सूत्रों के मुताबिक़ नेपाल के रास्ते हथियारों को तस्करी कर के पहले भारत भेजना और फिर उसे कश्मीर के आतंकियों तक पहुँचाने की कोशिशों में तेज़ी ला सकता है. दरअसल, इससे पहले इस रूट से हथियार, विस्फोटक और फेंक करंसी को भारत में लाए जाने का इतिहास पुराना है. और ISI की नजर नेपाल के तराई इलाक़े में मौजूद मुस्लिम जनसंख्या पर टिकी हुई है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि पाकिस्तानी आतंकियों को कश्मीर में ख़ाली हाथ घुसपैठ कराकर नेपाल के रास्ते ISI हथियारों की तस्करी को तेज करने की कोशिशें तेज करना है.
बहुत तेज़ी से बढ़ी तराई में मुस्लिम जनसंख्या, ISI की नजर उन पर टिकी
भारत और नेपाल 1751 किलोमीटर लंबी सीमा को साझा करते हैं. भारत के पांच राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से नेपाल जुड़ता है. कभी, इकलौता हिंदू राष्ट्र में गिने जाने वाले नेपाल में राजशाही का खत्म होना और 2006 के बाद से एक सेक्यूलर राष्ट्र के तौर पर खुद को स्थापित किया और इसके बाद ये जो डेमोग्राफ्कि बदलाव हुआ है वो चौंकाने वाला है. अभी भी हिंदू वहां मेजौरिटी में है उसके बाद बौद्ध और दूसरा सबसे बड़ा मज़हब है मुस्लिम. इसमें बड़ी तेज़ी से बढ़ाेतरी हुई है.
नेपाल में मुस्लिम दूसरी सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय
साल 2021 की जनगणना के आधार पर नेपाल में मुस्लिम दूसरी सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है जो कि नेपाल की जनसंख्या का 4.27 प्रतिशत है और इसका 95.5 फ़ीसदी लोग तराई इलाक़े में रहते हैं; जिनमें सबसे ज़्यादा 7 जिले जो कि उत्तर प्रदेश और बिहार से लगती सीमा के पास है. ये मुस्लिम बहुल इलाक़े पाकिस्तान के लिए नेपाल में ऑपरेशन चलाने का सबसे बड़ा स्ट्रैटेजिक लोकेशन हैं. खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक़ ISI तराई के मदरसों को फ़ंडिंग भी करता है. रिपोर्ट के मुताबिक़ इस वक्त नेपाल में 4000 के क़रीब मदरसे है. जिनमें से कुछ मदरसों को शिक्षा के लिए सरकारी अनुदान भी मिलता है.
नेपाल में भारत के खिलाफ चीन पाकिस्तान का गठजोड़
चीन के नेपाल में एक्टिव होने के बाद से अब चीन और पाकिस्तान दोनों मिलकर नेपाल में भारत के खिलाफ साज़िशों का ताना बाना बुनने में लगे है. ख़ुफ़िया रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि चीन और पाकिस्तान ने पिछले कुछ समय से नेपाल में अपनी गतिविधियों को बड़ी तेज़ी से आगे बढ़ाया है. उसके तहत एक तरफ़ तो चीन ने नेपाल में वन विलेज वन फ्रेंड अभियान की शुरुआत करने में लगा है तो वहीं, पाकिस्तानी आईएसआई के अधिकारी जो कि काठमांडू में पाकिस्तानी दूतावास में तैनात है; उनके दौरे नेपाल के मदरसों और उनसे संबंधित कार्यक्रम में बढ़े हैं.
ISI अफसरों ने बढ़ाई सक्रियता, स्लीपर सेल की मौजूदगी की आशंका
काठमांडू में पाकिस्तानी दूतावास में तैनात आईएसआई के अधिकारी लगातार ऐसे कार्यक्रम में हिस्सा लेना जा रहे हैं जो कि वहां के मदरसों में आयोजित किए जा रहे हैं. ख़ुफ़िया रिपोर्ट के मुताबिक़, इस तरह के लगातार दौरे का वहां के मुस्लिम समुदाय पर गहरा प्रभाव डाल सकता है. और हो न हो आईएसआई के स्लीपर सेल की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है. इनका इस्तेमाल पाकिस्तान भारत के खिलाफ भारत नेपाल सीमा के पास चल रही गतिविधियों की जानकारी इक्ट्ठा करने के अलावा भारत में आतंकी वारदातों की साज़िश, नेपाल के रास्ते भारतीय इलाक़े में घुसपैठ जैसे गतिविधियों में करता रहा है.
चीन और पाकिस्तान दोनों की साजिश
चीन और पाकिस्तान की गठजोड़, भारत के खिलाफ चीन में चल रहा है. पहले तो पीएलए के हेडक्वाटर में पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों की तैनाती की गई और फिर चीनी ख़ुफ़िया एजेंसियों के अधिकारियों का नेपाल में आईएसआई के एजेंटों में भारत संबंधी जानकारी जुटने की चीन की कोशिश बढ़ी है. बहरहाल भारत और नेपाल के बीच रिश्ते हमेशा से ही बेहतर रहे हैं लेकिन चीन के प्रभाव के चलते कुछ दिक़्क़ते पिछले समय में देखी गईं हैं. इसका फ़ायदा चीन के साथ- साथ पाकिस्तान भी उठा लेना चाहता है और कश्मीर में हथियारों को पहुँचाने के लिए नेपाल का इस्तेमाल कर सकता है.
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Tags: China, Isi, Jammu Kashmir Terrorist, Nepal, Pakistan
FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 21:37 IST






