Amazon Plane Crash: 4 दिन बाद ही मां की हो गई थी मौत, फिर सांपों से भरे जंगल में 40 दिन तक कैसे जिंदा रहे चारों बच्चे?


नई दिल्‍ली. अमेजन के जंगलों में प्‍लेन क्रैश के बाद फंसे चार बच्‍चों को 40 दिन बाद ढूंढ़ निकाला गया है. इस हादसे के चार दिन बाद तक बच्‍चों की मां जिंदा रही लेकिन इसके बाद उन्‍होंने भी दम तोड़ दिया. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर कैसे यह छोटे-छोटे बच्‍चे इतने लंबे वक्‍त तक घने जंगलों में जिंदा रहे. अमेजन के जंगलों में सांपों से लेकर अन्‍य खतरनाक जीव जंतुओं का बसेरा है. जिंदा मिले बच्‍चों में सबसे ज्‍यादा उम्र का बच्‍चा 13 साल का है जबकि सबसे छोटा बच्‍चा एक साल का है.

बच्‍चों के पास से दो छोटे बैग मिले जिसमें कुछ कपड़े, तोलिया, फ्लैशलाइट, दो सेलफोन, म्‍यूजिक बॉक्‍स और एक सोडा की बोतल थी. इस बोतल का इस्‍तेमाल वो जंगल में उपलब्‍ध पानी को भरकर पीने के लिए करते थे. फिलहाल चारों बच्‍चों को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार किया जा रहा है.

आखिर जंगल में कैसे जिंद रहे बच्‍चे?

न्‍यूज एजेंसी एसोसिएटिड प्रेस की खबर के अनुसार 13 साल के बच्‍चे के पिता मैनुअल रानोक ने अस्‍पताल के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि बेटे ने मुझे बताया है कि उसकी मां प्‍लेन कैश के करीब चार दिन बाद तक जिंदा रही. मां ने उन्‍हें कहा होगा कि तुम प्‍लेन के मलबे से दूर चले जाओ. ‍रेस्‍क्‍यू टीम का हिस्‍सा हेनरी गुरेरो ने कहा, “जैसे ही बच्‍चे हमें मिले वो काफी भूखे थे. वो चावल और ब्रेड खाना चाहते थे.” एक अन्‍य बच्‍चे के पिता ने कहा, “जंगल में सांप, अन्‍य जानवर और मच्‍छरों से बचने के लिए वो पेड़ के तनें के अंदर जाकर छुप जाते थे.”

स्‍थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार इन चारों बच्‍चों ने जंगल के वातावरण में खुद को ढाल लिया था. प्रकृति के साथ जुड़कर रहने के कारण उन्‍हें जंगल में रहने में ज्‍यादा दिक्‍कत नहीं आई. जंगली फलों को खाकर वो अमेजन के जंगलों में अपना पेट भरते थे. एएफपी की रिपोर्ट में कोलंबिया के राष्‍ट्रीय स्‍वदेश संगठन ओएनआईसी के हवाले से बताया गया ये चारों बच्‍चे स्‍वदेशी हैं और उन्‍हें जंगल के बारे में पहले से ही काफी कुछ पता था. उन्‍होंने बताया कि बच्‍चों ने जंगली फलों के अलावा वहां उपलब्‍ध बीज, पौधे और उनकी जड़ों को खाया.

कैसे मिले बच्‍चे?

अमेजन के जंगलों में 1 मई को सेसना 206 लाइट एयरक्राफ्ट क्रैश कर कर गया था. इस प्‍लेन ने अरराकुआरा और ग्वावियारे के एक शहर सैन जोस डेल ग्वावियारे के बीच उड़ान भरी थी. एटीसी से इसका संपर्क टूट गया. बाद में जानकारी मिली कि यह कहीं क्रैश कर गया है. जाहज को ढूंढने के लिए अभियान चलाया गया. 100 से अधिक सैनिकों की मदद इसमें ली गई. विमान के मलबे के पास पायलट और एक अन्‍य शख्‍स का शव मिला था. अन्‍य सदस्‍यों के शव नहीं मिलने के कारण आशंका थी कि यह बच्‍चे जिंदा हैं. इसीलिए उनकी खोजबीन बंद नहीं की गई थी.

Tags: Plane accident, Plane Crash

Source link

Jagran Times
Author: Jagran Times

Leave a Comment

Read More

उत्तर प्रदेश के बांदा निवासी 9 वर्षीय पुत्र ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया 2 मिनट में 200 देश के झंडे पहचान कर बताने वाला पार्थ झा नमक बच्चों ने इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है माता-पिता वर्तमान में मुंबई में रहते हैं डॉक्टर जे विक्रम चाइल्ड स्पेशलिस्ट चाइल्ड केयर नर्सिंग होम के मालिक मामा है मामा जी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि उनका भांजा पार्थ झा ने 2 मिनट में 200 देश के फ्लैग पहचान कर बताने में महारत हासिल की है महाराष्ट्र राज्य में स्थित संस्था ने गोल्ड मेडल और एक प्रमाण पत्र दिया है इस वक्त उसका नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ़ रिकार्ड्स मैं दर्ज किया गया है भांजा और बहन पार्थझा मां जयश्री पिता अशोक झा बांदा के रहने वाले हैं हालांकि इसमें कोई शक नहीं है इतनी कम उम्र में 200 देश के झंडों का पहचान करना यह एक चमत्कार ही है दिमाग इस बच्चे का कंप्यूटर की तरह कार्य कर रहा है बांदा का लाल मुंबई में रहकर नाम पैदा कर रहा है सिर्फ बांदा भर का नहीं पूरे विश्व में भारत का नाम ऊंचा किया