
नई दिल्ली. महंगाई के मोर्चे पर आम आदमी को बड़ी राहत मिली है. मई महीने के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI के आंकड़े जारी हो गए हैं. इसके साथ ही भारत में खुदरा महंगाई दर सालाना आधार पर 25 महीने के निचले स्तर 4.25 प्रतिशत पर आ गई है. जबकि अप्रैल में यह 4.70 प्रतिशत थी. ये आंकड़े से ना सिर्फ आम आदमी के लिए, बल्कि सरकार और आरबीआई के लिए भी राहत लेकर आए हैं. इससे पता चलता है कि महंगाई पर नियंत्रण को लेकर रिजर्व बैंक की कोशिशें कामयाब हुई है.
सीपीआई आधारित महंगाई लगातार चौथे महीने भारतीय रिजर्व बैंक की निर्धारित सीमा 2-6 फीसदी के अंदर रही है. जनवरी से अब तक 227 बेसिस पॉइंट की भारी गिरावट के बावजूद, CPI महंगाई लगातार 44वें महीने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मध्यम अवधि के लक्ष्य 4 फीसदी से ऊपर बनी हुई है.
तेल और खाद्य पदार्थ की कीमत कम हुई
खाद्य एवं ईंधन उत्पादों की कीमतें नरम पड़ने से मई में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 25 माह के निचले स्तर 4.25 प्रतिशत पर आ गई. सरकार की तरफ से सोमवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई. आंकड़ों के अनुसार, मई, 2023 में खुदरा मुद्रास्फीति 4.25 प्रतिशत रही जो अप्रैल, 2021 के बाद का सबसे निचला स्तर है. अप्रैल, 2021 में खुदरा मुद्रास्फीति 4.23 प्रतिशत पर थी.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अप्रैल, 2023 में 4.7 प्रतिशत रही थी. वहीं एक साल पहले मई, 2022 में खुदरा मुद्रास्फीति 7.04 प्रतिशत के स्तर पर थी. इस तरह लगातार चौथे महीने में खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट आई है. इसके साथ ही यह लगातार तीसरा महीना है जब खुदरा मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर पर है. सरकार ने रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट बढ़ के साथ 4 प्रतिशत पर रखने का दायित्व सौंपा हुआ है.
पिछले महीने में खुदरा मुद्रास्फीति में आई गिरावट के पीछे मुख्य रूप से खाद्य उत्पादों एवं ईंधन की कीमतों में आई गिरावट की अहम भूमिका रही है. मई में खाद्य मुद्रास्फीति 2.91 प्रतिशत रही जबकि अप्रैल में यह 3.84 प्रतिशत थी. खाद्य उत्पादों की सीपीआई सूचकांक में हिस्सेदारी करीब आधी होती है. इसके अलावा ईंधन एवं प्रकाश खंड की मुद्रास्फीति भी 4.64 प्रतिशत पर आ गई, जबकि अप्रैल में यह 5.52 प्रतिशत रही थी.
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Tags: Inflation, RBI, RBI Governor
FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 18:16 IST






