चूरू के इस फोटोग्राफर के शिष्य पाकिस्तान में भी, चौथी पीढ़ी संभाल रही कारोबार, दुलर्भ तस्वीरों का है खजाना


नरेश पारीक / चूरू. शहर के सोनी परिवार के पास 87 साल पहले फोटो खींचने के लिए जिन कैमरों का उपयोग होता था उनका कलेक्शन आज भी मौजूद है. फोटोग्राफर जसकरण सोनी के इन कैमरों को देखने के लिए आज भी लोगों की यहां भीड़ जुटती है. सोनी परिवार की आज चौथी पीढ़ी ने इस नायाब संग्रह को अपने नई सड़क स्थित स्टूडियो में सहेज कर रखा है. 58 वर्षीय राजेंद्र सोनी बताते है कि उनके पिता जसकरण सोनी ने देश आजाद होने से पहले 1936 में फोटोग्राफी करनी शुरू की थी. जिनके द्वारा खींची गई तस्वीरे आज दुर्लभ तस्वीरे बनकर रह गई है. सोनी बीकानेर रियासत के उस वक्त के चुनिंदा फोटोग्राफर्स में एक थे.

पाकिस्तान में भी है इनके शिष्य

सोनी की काबलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके शिष्य आज देश ही नहीं बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी है. सोनी परिवार की चौथी पीढ़ी को फोटोग्राफी का ये कारोबार विरासत में मिला है. राजेंद्र सोनी ने बताया कि उनके पिताजी जसकरण सोनी का 99 साल की उम्र में साल 2009 में निधन हो गया और वह उनके भाई और उनके बच्चे और पोते आज फोटोग्राफी कर रहे हैं.

पहले एक फोटो को बनाने में 3 दिन लगते थे
दूसरी पीढ़ी के राजेंद्र सोनी ने बताया कि पहले इतने संसाधान नही थे और मशीने भी इतनी हाईटेक नहीं थी. उस समय एक फोटो लेने में भी काफी समय लगता था और फ़ोटो को तैयार करने में करीब 3 दिन का समय लग जाता था. वही वक्त के साथ मशीने आधुनिक हो गई और आज फ़ोटो खींचने के बाद 5 मिंट भी नहीं लगते ग्राहक को फ़ोटो तैयार करके दे देते हैं.

अब सेल्फी का जमाना
सोनी का कहना है कि पहले के जमाने मे फोटोग्राफी का अच्छा क्रेज था और लोगो में अपनी फ़ोटो खिंचवाने की चाहत थी बदलते समय के साथ मल्टीमीडिया मोबाइल फ़ोन आए और सेल्फी का क्रेज आ गया. लेकिन आज भी बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें फ़ोटो खिंचवाने का शौक और चाहत है वो अक्सर आते हैं और शादी और अन्य समारोह में फोटो खिंचवाने के लिए बुलाते हैं.

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Author: Jagran Times

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