मानसून से पूर्व हुई बरसात ने लौटाई प्राचीन तालाबों की रंगत, तालाबों के पास पिकनिक मना रहे पर्यटक

 निखिल स्वामी/ बीकानेर. शहर में कई ऐसे तालाब हैं जो मानसून के दौरान बारिश पर ही निर्भर हैं. ऐसे में शहर में पिछले दिनों हुई बारिश ने इन तालाबों की प्यास ही नहीं बुझाई, पानी से उनकी झोली भी भर दी है.तालाब और बावडिय़ा आदिकाल से ही जल संरक्षण के प्राकृतिक स्रोत रहे हैं. ऐसे में धोरों की धरती बीकानेर में कई तालाब और बावड़ियां पानी से काफी भर गई है. अब सुबह और शाम को बच्चे यहां खेलने, नहाने के लिए आते हैं. वहीं कई इन तालाबों के किनारे बैठकर गोठ यानी सामूहिक भोज का आनंद ले रहे हैं.

मानसून पूर्व हो चुकी 72 एमएम बारिश

पुराने तालाबों को लेकर शोध करने वाले और बीकानेर निवासी संजय श्रीमाली ने बताया कि बीकानेर में कई तालाब हैं, जो पिछले दिनों आई बारिश से भर गए है. अब तक अधिकतम 72 मिमी बारिश दर्ज की गई है. जो प्रदेश में सबसे ज्यादा बीकानेर में हुई है.इस रेगिस्तान मेंलोग या तो भूजल के लिए बावडिय़ों पर निर्भर थे या फिर तालाबों पर. तालाबों को भरने का प्राकृतिक स्रोत बारिश ही होती थी. शहर में कई ऐसे तालाब तैयार किए हैं, जिनमें बारिश का पानी जमा होता है.पिछले दिनों शहर में हुई झमाझम बारिश ने इन तालाबों की रंगत बढ़ा दी है. जो तालाब मानसून से पहले रूखे-सूखे और उपेक्षित दिखते थे, पानी भरने से अब लोगों को लुभाने लगे हैं. अब लोग सुबह-शाम सैर के लिए इन तालाबों के किनारे जुटने लगे हैं, तो बच्चे भी खेलते दिखते हैं.

श्रीमाली ने बताया कि बीकानेर के हर्षोलाव तालाब, संसोलाव तालाब, सवालखी तलाई, घड़सीसर, गोगाजी की तलाई और सुसागर तालाबों में पानी भरा है.

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FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 16:06 IST

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Author: Jagran Times

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