राजमिस्त्री के बेटे ने किया कमाल, 15 साल की उम्र में प्लास्टिक से बना डाला पेट्रोल; हर तरफ हो रही वाहवाही

गुलशन सिंह/बक्सर. कहा गया है प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती. इसी को सच साबित कर दिखाया है बक्सर के वैज्ञानिक सोच रखने वाले एक छात्र ने. जिले के राजपुर प्रखंड क्षेत्र के नागपुर गांव के राजमिस्त्री का बेटा विकास कुमार ने वो कारनामा कर दिखाया है जो बड़े-बड़े वैज्ञानिक नहीं कर पाएं. विकास की आयु महज 15 वर्ष है और वह कक्षा नौंवी का छात्र है. विकास ने जुगाड़ के माध्यम से कचरे के प्लास्टिक से पेट्रोल तैयार कर सभी को चौंका दिया है.

विकास के इस अनोखे प्रयास की सराहना हर कोई कर रहा है. वह एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हुए भी इतना बड़ा काम किया है. विकास के पिता चन्द्रजीत कुशवाहा एक राजमिस्त्री है जबकि माता सविता देवी गृहणी है. वहीं विकास दो भाई और एक बहन में सबसे छोटा है. विकास सरकारी स्कूल का छात्र है. पेट्रोल के अलावा विकास अन्य कई प्रोजेक्ट पर भी कम कर रहा है. इससे पहले विकास ने गूगल कंट्रोल मशीन भी बनाया था. जिसके माध्यम से घर के पंखे, लाइट, टीवी इत्यादि कही से भी ऑन और ऑफ किया जा सकता है.

आठवीं कक्षा में पढ़ने के दौरान आया था यह आइडिया
विकास ने बताया कि जब आठवीं कक्षा में पढ़ रहा था, उसी समय किताब में एक टॉपिक दिया गया था कि कोयला से कोलतार कैसे बनाया जाता है. इसी के बाद उसके दिमाग में यह आइडिया आया. जिसके बाद प्लास्टिक से पेट्रोल बनाने के लिए घर पर प्रयास शुरू कर दिया. विकास ने बताया कि उसने पढ़ा था कि पेट्रोलियम से ही प्लास्टिक बनता है. जब पेट्रोलियम को शोध किया जाता है तो डीजल, पेट्रोल, किरोसिन निकलने के बाद नीचे के अवशेष नेप्टा से केमिकल ब्लीचिंग कर के प्लास्टिक बनाया जाता है.

ऐसे मिली कामयाबी
विकास ने बताया कि सबसे पहले उसने एक टिन का कंटेनर बनाया, फिर उसमें लोहे का पाइप वेल्डिंग किया. वहीं एक प्लास्टिक के पाइप में बोतल जोड़कर उसे लोहे के पाइप से कनेक्ट किया कर गैस पर चढ़ाया. उसके बाद बोतल को ठंडे पानी में रखा. वहीं टिन में सारा प्लास्टिक कचरा डाल कर जब उसे गर्म किया जाएगा तो प्लास्टिक गल कर तरल पदार्थ में तब्दील हो गया. वहीं पाइप द्वारा प्लास्टिक से बने पेट्रोलियम बोतल में इकट्ठा हो जाता है, जिसे माचिस से जलाने पर पेट्रोल की तरह जलने लगता है.

200 रुपये में प्लास्टिक से पेट्रोल कर देता है तैयार
विकास ने बताया कि शुरुआती दौर में इस जुगाड़ को तैयार करने में 1500 रुपये खर्च हो गए थे. जबकि दो बार असफल भी हो गए. वहीं अब मात्र 200 रुपये के खर्च में प्लास्टिक से पेट्रोल तैयार कर देते हैं. विकास ने बताया कि एक किलोग्राम प्लास्टिक में 100 एमएल पेट्रोल तैयार कर लेते हैं. विकास का सपना है कि वह एक बड़ा साइंटिस्ट बने और देश के लिए काम करे. लेकिन, इसके लिए बड़े कॉलेज में एडमिशन लेनी पड़ेगी. लेकिन, परिवार की आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नहीं है कि विकास का नामांकन किसी बड़े संस्थान करवा सके. ऐसे में यदि सरकार चाहे तो विकास की प्रतिभा को सपोर्ट कर निखार सकती है.

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FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 12:49 IST

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Author: Jagran Times

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