हाइलाइट्स
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजनारायण की याचिका पर इंदिरा गांधी को चुनावों में सरकारी संसाधनों के दुरूपयोग का दोषी पाया
इंदिरा गांधी फैसले के बाद इस्तीफा देना चाहती थीं लेकिन उनके सलाहकारों ने उन्हें ऐसा नहीं करने की सलाह दी
12 जून 1975 का दिन सियासी तौर पर इलाहाबाद से लेकर दिल्ली तक गहमागहमी से भरा हुआ था. दिल्ली में राजनारायण के घर मेला सा लगा था तो इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री आवास पर लगातार आने-जाने वालों का तांता था. सियासी सरगर्मियां जोरों पर थीं उस दिन दिल्ली में इंदिरा गांधी के आवास 01, सफदरजंग रोड पर भारी भीड़ उनका अभिवादन करने आई. फैसले के बाद भीड़ ने दिल्ली में नारे लगाए, ” इंदिरा गांधी संंघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं”, लोगों ने उनसे पद पर बने रहने का आग्रह किया. कुछ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को कोसा. दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ ऐसा फैसला दिया था, जो पूरे देश की राजनीति को बदलने वाला था. पूरे देश में इस फैसले से सनसनी फैल गई.
सुबह 10 बजे, इलाहाबाद हाईकोर्ट का कमरा नंबर 15
इलाहाबाद हाईकोर्ट के कमरा नंबर 15 में ठीक 10 बजे इंदिरा गांधी के भाग्य का फैसला जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा कर चुके थे. उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को रायबरेली चुनावों में अनियमितताओं की राजनारायण की याचिका पर उन्हें दो मामलों में दोषी पाया. फैसले में उनके अगले 06 सालों तक कोई भी चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी. जस्टिस सिन्हा ने उन्हें इस फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 20 दिनों का समय दिया.
इंदिरा ठीक 11 बजे दिल्ली में घर से निकलीं
जब एक गहमागहमी इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस सिन्हा के फैसले के साथ खत्म हो चुकी थी तो असली सक्रियता दिल्ली के सियासी गलियारे में शुरू हो चुकी थी. फैसला आने के बाद इंदिरा 11 बजे सुरक्षा के बीच 01 सफदरजंग रोड से निकलीं. कश्मीर हाउस पहुंची. वहां उन्होंने डीपी धर के चित्र पर फूल चढ़ाए और शोक संवेदना जाहिर की. डीपी धर रूस में भारत के राजदूत थे और कश्मीर के रहने वाले थे.
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शाम को कांग्रेस संसदीय दल की बैठक हुई
शाम को दिल्ली में कांग्रेस संसदीय दल की बैठक हुई. ये मुश्किल से 45 मिनट तक चली. जिसमें सभी सीनियर कांग्रेसियों ने इंदिरा से पद पर बने रहने के लिए कहा, जिसमें वाईबी चव्हाण और जगजीवन राम भी शामिल थे. जो बयान कांग्रेस के संसदीय बोर्ड ने बाद में जारी किया, वो यही था कि बोर्ड ने इंदिराजी ने पद पर बने रहने के साथ सुप्रीम कोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील करने का फैसला किया है.
मीटिंग में उमाशंकर दीक्षित, डीके बरूआ और कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद थे. इंदिरा ने फिर ऐलान किया कि वो पद पर बनी रहेंगी. राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद उस समय श्रीनगर के दौरे पर गए हुए थे. उन्होंने तुरंत अपना कार्यक्रम कट किया और दिल्ली लौटने का फैसला किया.
यही फैसला देश में आपातकाल (Emergency in India) लगने का कारण बना था. (फाइल फोटो)
इंदिरा के कानूनी सलाहकारों ने क्या कहा
इंदिरा के कानूनी सलाहकारों ने कहा कि उन्हें जस्टिस सिन्हा के पूरे फैसले को पढ़ने और इसके खिलाफ अपील के लिए 04-05 दिनों का समय चाहिए होगा. उस समय सुप्रीम कोर्ट का ग्रीष्मावकाश चल रहा था. वीआर कृष्णा अय्यर वोकेशन जज थे.
इंदिरा को पद से हटने से रोका गया
खबर ये भी थी कि इंदिरा ने इस फैसले के बाद पद से हटने के बारे में सोचा लेकिन उनके कानूनी सलाहकारों नानी पालकीवाला, सिद्धार्थशंकर रे और कानून मंत्री एच आर गोखले ने उन्हें ऐसा नहीं करने को कहा. हालांकि राजनारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से इस फैसले के उपरांत कैविएट भी ले लिया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार बीसी जौहरी ने बताया कि वो फैसले की एक कॉपी लोकसभा स्पीकर और मुख्य चुनाव आयुक्त को भेज रहे हैं.
कांग्रेस और इंदिरा को एक और झटका लगा
इसी दिन कांग्रेस और इंदिरा गांधी को एक औऱ झटका लगा. गुजरात में पांच पार्टियों का जनता मोर्चा विजय की ओर बढ़ रहा था. ऐसा लग रहा था कि वो कांग्रेस को हराकर राज्य में सरकार बना लेगा. ऐसा हुआ भी. ये कांग्रेस के लिए बहुत बेचैन करने वाली खबर थी.
जस्टिस जगमोहन सिन्हा ने ही ही इलाहबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High court) का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. (फाइल फोटो)
विपक्षी दल भी सक्रिय हो उठे
एक ओर कांग्रेस में कश्मकस थी, जिसे ऊपरी तौर पर खत्म करने की कोशिश की गई थी तो विपक्ष ने भी इंदिरा गांधी से इस्तीफे की मांग कर डाली. जनसंघ ने भी 12 जून को प्रधानमंत्री निवास के बाहर इस्तीफा मांगते हुए प्रदर्शन किया.
विपक्ष ने इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग करते हुए जो मीटिंग की, उसमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानि सीपीआई ने शिरकत नहीं की लेकिन कांग्रेस ओ, भारतीय लोकदल, जनसंघ और सोशलिस्ट पार्टी के प्रतिनिधि नेताओं ने इसमें शिरकत की. इसमें फैसला किया गया कि विपक्ष का एक शिष्टमंडल राष्ट्रपति के पास जाएगा और एक बड़ी रैली दिल्ली में आयोजित की जाएगी, हालांकि उसका दिन तय नहीं किया गया.
राजनारायण तो हीरो बन चुके थे
विपक्षी पार्टियों के बीच राजनारायण हीरो बन चुके थे. उन्हें उनके सहयोगी विपक्षी नेता धड़ाधड़ बधाइयां भेज रहे थे. बहुत से विपक्षी नेता राजनारायण के घर पहुंचे. गले मिलकर उन्हें बधाई दी. उस दिन राजनारायण के घर पर भी मेला सा लगा था. उनके आवास पर पहले लड्डू बांटे गए और फिर बनारसी पान खिलाए गए.
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Tags: Allahabad high court, Allahabad High Court Order, Indira Gandhi, Prime Minister of India
FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 09:10 IST






