कासिम खान/नूंह: आपने मिठाइयां तो बहुत खाई होंगी, लेकिन आज हम आपको ऐसी मिठाई के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे लोग औषधि समझकर भी खाते हैं. यहीं नहीं नेता, अफसर से लेकर आम आदमी तक इस मिठाई का दीवाना है. लोगों का कहना है कि इस मिठाई का स्वाद ही कुछ ऐसा है कि जो एक बार चख ले, फिर इसको भूलता नहीं है.
नूंह के पुनहाना कस्बे की इस मिठाई का नाम है अत्रि फल. लोग इस मिठाई को स्वादिष्ट के साथ-साथ सेहत के लिए लाभदायक मानकर दशकों से खा रहे हैं. अत्रि फल मिठाई आज से करीब 80 साल पहले कालूराम पंसारी ने बनानी शुरू की थी. कालूराम पंसारी वैद्य हकीम का काम करते थे. उन्हीं के मन में इस मिठाई को बनाने का ख्याल आया.
कालूराम की चौथी पीढ़ी अत्रीफल मिठाई को बेचने का काम कर रही है. स्व. कालूराम पंसारी का परिवार इन मिठाइयों को बनाने के लिए किसी हलवाई या मजदूरों की मदद नहीं लेता, बल्कि खुद अपने हाथों से बनाता है. दावा किया जाता है कि सिर दर्द, जोड़ों का दर्द, कमजोरी या फिर शरीर की गर्मी को यह मिठाई पूरी तरह से खत्म कर देती है.
एक ही दुकान पर मिलती है मिठाई
दुकानदार दिनेश कुमार गर्ग ने बताया कि उनके दादा वैद्य हकीम का काम करते थे. उस समय नब्ज-नाड़ी देखकर दवा दी जाती थी. फिर उन्होंने अत्रि फल नाम की मिठाई बनानी शुरू की थी और इसी मिठाई के कारोबार से आज उनका परिवार पल रहा है. दिनेश कुमार के पिता व अब उनके पुत्र भी इसी मिठाई को बना रहे हैं. इस मिठाई में काजू, बादाम, इलायची, खरबूजा-तरबूज के मगज, खांड, देसी घी, धनिया इत्यादि मिलाया जाता है. सबसे खास बात यह है कि जिले के पुन्हाना शहर में भी सिर्फ एक दुकान पर ही यह मिठाई मिलती है.
दो तरह की मिठाई, अलग-अलग रेट
दिनेश का दावा है कि शरीर की छोटी-मोटी बीमारी इस मिठाई के खाने से समाप्त हो जाती है. बताया इस मिठाई की डिमांड भी तेजी से मार्केट में बढ़ रही है. उनके यहां दो प्रकार की अत्रि फल मिठाई बनती है. एक मिठाई 150 रुपये प्रति किलो है, उसमें कुछ मैटेरियल कम डाला जाता है और अच्छी क्वालिटी की मिठाई 470 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेची जा रही है. दोनों प्रकार की मिठाई को खरीदने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है.
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FIRST PUBLISHED : May 28, 2023, 22:02 IST









