'अखंड भारत' से लेकर समुद्र मंथन तक… नए संसद में लगीं प्राचीन भारत को दर्शाती ये खास कलाकृतियां

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नए संसद भवन का उद्घाटन किया. संसद भवन की इस बेहद आकर्षक हाईटेक और आकर्षक नई इमारत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं. इनमें संसद भवन में लगे ‘अखंड भारत’ से लेकर समुद्र मंथन तक के भित्ती चित्र के अलावा देश के महानायकों और सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखाई गई है.

संसद भवन में लगे ये भित्तिचित्र (म्यूरल), अतीत के महत्वपूर्ण साम्राज्यों और शहरों को चिह्नित करते है और वर्तमान पाकिस्तान में तत्कालीन तक्षशिला में प्राचीन भारत के प्रभाव को दर्शाता है. कई लोगों ने दावा किया कि यह ‘अखंड भारत’ के संकल्प को दिखाता है. इसके अलावा एक अन्य भित्तिचित्र में चाणक्य को दर्शाया गया है. वह चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे और कौटिल्य या विष्णुगुप्त नाम से भी मशहूर हैं. मौर्य वंश की स्थापना में उनका बड़ा योगदान माना जाता है. कौटिल्य ने अर्थशास्त्र नामक ग्रन्थ की रचना की थी, जो राजनीति, अर्थनीति, कृषि और समाजशास्त्र आदि का महान ग्रंथ माना जाता है. वहीं एक अन्य भित्तिचित्र में दक्षिण भारत के साम्राज्यों जैसे चोल, पाण्ड्य, केरलपुत्र, द्रविड़ के अलावा भारत के प्राचीन धर्मग्रंथ को दर्शाया गया है. संसद भवन में लगे भित्तिचित्र में सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. बीआर आंबेडकर को भी दर्शाया गया है. पटले जहां आजाद भारत के पहले गृहमंत्री थी, वहीं डॉ. आंबेडकर को भारतीय संविधान की रचना का श्रेय दिया जाता है. इस भित्तिचित्र में ओडिशा के कोणार्क स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर के चिह्न को दर्शाया गया है. 13वीं शताब्दी की इस ऐतिहासिक धरोहर को यूनेस्को ने विश्व विरासत घोषित कर रखा है. सूर्य भगवान के रथ के आकार में बनाया गया यह मंदिर मध्यकालीन भारत की वास्तुकला, विशिष्ट आकार और शिल्पकला का अनोखा उदाहरण है. इसके अलावा देश की सांस्कृतिक विविधता को भी दर्शाता एक भित्तिचित्र लगाया गया है. इसमें जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक की सांस्कृतिक झलक दिखाया गया है. वहीं एक अन्य भित्तिचित्र अलग-अलग हस्त भंगिमाओं के जरिये नृत्य कला को दर्शाया गया है. नए संसद भवन में समुद्र मंथन की एक कलाकृति भी उकेरी गई है. पौराणिक कथा है कि देवताओं और दानवों ने मिलकर अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया था, इसी घटना को नरेश कुमावत नामक मूर्तिकार संसद भवन में लगी कलाकृति में दर्शाया है. नए संसद भवन में प्रदर्शित इन कलाकृतियों के चयन में शामिल नेशनल गैलरी ऑफ मॉर्डन आर्ट के महानिदेशक अद्वैत गडनायक कहते हैं, ‘हमारा विचार प्राचीन युगों के दौरान भारतीय विचारों के प्रभाव को चित्रित करना था. यह उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में वर्तमान अफगानिस्तान से लेकर दक्षिण-पूर्वी एशिया तक फैला हुआ है.’

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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