Mother’s Day 2023: मदर्स डे पर घर से दूर शहर में ज़िन्दगी बिताने को मजबूर एक बेटे की मां के नाम चिट्ठी

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Mother’s Day 2023 Special Letter: अम्मा, आज का अखबार देखी क्या? देखो ना. हर पन्ने पर तुम्हारी ही चर्चा है, तुम्हारा ही गुणगान है. एक बार देखो तो. सब कह रहे हैं आज मदर्स डे है. तुम्हारा दिन. तुमसे प्यार जताने का दिन.एकदम कन्फ्यूज हो गए हैं. बताओ तो. तुमसे प्यार जताने के लिए भी किसी दिन का इंतजार करना पड़ेगा भला. जानती हो, पिछले बीस दिन से रातों को नींद नहीं आ रही है. हर रात तुम्हारी लोरी याद कर के तकिया गीला कर रहे हैं और चादर के कोने से आंसू पोंछ तुम्हारे आंचल के भरपाई की असफल कोशिश कर रहे हैं. पूरी रात तुम्हारी थपकी की छुअन पाने को करवट बदलते रहते हैं. हवा के हर झोंके से लगता है जैसे तुम गोद में मेरा सर रखकर सहला रही हो.

अम्मा, जानती हो, कल रात जब थोड़ी देर के लिए झपकी लगी, लगा शायद तुम गांव में वही लोरी गाकर हमे सुला रही हो जिसकी भरपाई अबतक कोई फिल्मी गीत नहीं कर पाया. सुबह जैसे ही सूरज की पहली किरण माथे पर पड़ी, लगा जैसे हरदम की भांति मेरे माथे को चूम तुम कह रही हो-बाबू उठ जा, भोर हो गयी. अम्मा जबसे तुम गांव गयी हो, नलके का पानी भी अब जलन देता है. बगैर तुम्हारे हाथों के मालिश के नहाना भी अधुरा ही लगता है. सरसों के तेल से अब भी मालिश करता हूं पर लगता है बदन को आज भी तुम्हारे ही हाथों की छुअन याद है. क्या बताऊं अम्मा, पेट भर खाना भी अब जी को सुकून नहीं देता. तुम्हारे हाथों निवाला खाने की आदत जो पड़ गयी थी इसे. मानो अब तुम्हारे हाथों का दो निवाला ही जी की बेचैनी बुझा सकता है. जानती हो, अब ऑफिस जाने के लिए भी खुद से तैयार हो जाता हूं मै. पर जब भी सूट के बटन लगाता हूं, आंखों के आगे सब धुंधलका हो जाता है. लगता है तुम अभी किचन से आओगी और मेरे सूट के बटन ठीक वैसे ही लगाओगी जैसे बचपन में स्कूल भेजने से पहले मेरे शर्ट की बटन लगाया करती थी.

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पता है अम्मा अभी मै ऑफिस की कैंटिन में बैठा हूं. पर बस बैठा हूं. क्योंकि मै यहां तो हूं ही नहीं. हूं तो मै अब भी तुम्हारे चूल्हे के पास ही. चूल्हे में आलू पकने को डालता हुआ और तुम्हारे ये कहने का इंतजार करता हुआ कि अरे-अरे ठंडा करके खाओ, मूंह जल जाएगा. अब कोई नहीं टोकता अम्मा. कोई शाम को दरवाजे पर खड़ा इंतजार भी नहीं करता जैसे तुम करती थी हमारे स्कूल से आने का. और दूर से आता देख ही एक सूकून भरी मुस्कान लिए जोर से चिल्लाती- जल्दी बैग रख कर आ जाओ थाली तैयार है. रात की रोटी भी अब मै खुद ही बनाता हूं अम्मा. सीख रहा हूं, हाथ भी जलाता हूं पर कहीं से कोई हाथ नहीं आता उस जले पर मलहम लगाने को. हर रोटी को तवे पर डाल आंसू बहाता हूं और इस उम्मीद में बिछावन पर जाता हूं कि शायद आज तकिये की जगह तुम्हारी गोद मिल जाए, आज पंखे के बदले तुम्हारे आंचल की ठंडी हवा मिल जाए, शायद आज तुम्हारी हथेली की थपकियों से वर्षों की थकान मिट जाए.

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तुम मुझे गोद में झूला झुलाती बिल्कुल वैसे ही लोरी सुनाओ मानो कोई कुम्हार बड़े लाड़ और जतन से अपने कच्चे घड़े को पकाने की कोशिश कर रहा हो. और मै तुम्हें वैसे ही निहारते-निहारते नींद की आगोश में खो जाऊं. अम्मा हमारी तो रोज सुबह तुमसे ही शुरू होकर रात तुमपर ही खतम होती है. अब लोगों को कैसे समझाएं, तुमसे प्यार करने के लिए हम 365 दिन तो क्या 365 पल का इंतजार भी नहीं कर सकते. हमारा तो हर दिन, हर पल मदर्स डे के साये में बीतता है, क्योंकि तुम हो, तो हम हैं और हमारा लम्हा बस तुमसे है.

तुम्हारा लल्ला, गौरव

Tags: Mother, Mothers Day Special, Relationship

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Author: Up Head Line

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