बच्चों में नींद की समस्या बन रही है मानसिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती : डॉ. अजय मिश्रा

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प्रयागराज

बच्चों में नींद की समस्या बन रही है मानसिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती : डॉ. अजय मिश्रा

प्रयागराज। आज बड़ी संख्या में बच्चे देर रात तक जागने, बार-बार नींद टूटने और सुबह थकान महसूस करने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में नींद की कमी केवल शारीरिक थकान नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है।

राजरूपपुर स्थित प्रमिला न्यूरो ब्रेन एंड नशा मुक्ति क्लिनिक के विशेषज्ञ डॉ. अजय मिश्रा बताते हैं कि बच्चों में नींद की समस्या के पीछे परीक्षा तनाव, मोबाइल-इंटरनेट का अधिक उपयोग, दिनचर्या की अनियमितता और भावनात्मक दबाव प्रमुख कारण हैं। नींद पूरी न होने पर बच्चों में चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी, पढ़ाई में मन न लगना और व्यवहार संबंधी समस्याएँ बढ़ने लगती हैं।

डॉ. मिश्रा के अनुसार कई बार माता-पिता इसे सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि लगातार नींद की कमी बच्चों के मानसिक विकास को प्रभावित कर सकती है। समय रहते सही परामर्श और जीवन शैली में सुधार से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

 

केस स्टडी 1:
“रात भर करवटें बदलता रहता था”
(पिता – अमित शुक्ला, नाम परिवर्तित)
“मेरा बेटा कक्षा 8 में पढ़ता है। रात में देर तक जागता रहता था और सुबह स्कूल जाने में परेशानी होती थी। हमें लगा मोबाइल की आदत है, लेकिन जब कई दिन तक नींद नहीं आई तो चिंता बढ़ गई। डॉ. मिश्रा से परामर्श के बाद पता चला कि पढ़ाई और अपेक्षाओं का दबाव उसकी नींद बिगाड़ रहा था। कुछ हफ्तों में उसकी नींद और व्यवहार दोनों में सुधार आया।”

केस स्टडी 2:
“नींद पूरी न होने से पढ़ाई में मन नहीं लगता था”
(माता – पूजा अग्रवाल, नाम परिवर्तित)
“मेरी बेटी परीक्षा के समय रात को सो नहीं पाती थी। बार-बार डर कर उठ जाती थी और कहती थी कि उसे सब भूल जाएगा। काउंसलिंग के दौरान हमें भी समझाया गया कि घर का तनाव और डर का माहौल उसे प्रभावित कर रहा है। अब उसकी नींद पहले से बेहतर है और वह खुद को ज़्यादा शांत महसूस करती है।”

केस स्टडी 3:
“सुबह उठते ही चिड़चिड़ापन रहता था”
(माता – रेखा यादव, नाम परिवर्तित)
“हमारे बेटे को सुबह उठते ही गुस्सा आने लगता था और स्कूल जाने से मना करता था। बाद में पता चला कि वह ठीक से सो ही नहीं पा रहा था। डॉ. मिश्रा ने दिनचर्या सुधारने, स्क्रीन टाइम कम करने और संवाद बढ़ाने की सलाह दी। कुछ समय बाद उसका व्यवहार काफी संतुलित हो गया।”

डॉ. अजय मिश्रा के अनुसार बच्चों की अच्छी नींद उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य की नींव होती है। आवश्यकता पड़ने पर मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और सही मार्गदर्शन बच्चों को तनावमुक्त और मानसिक रूप से मजबूत बनाने में सहायक होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चों की नींद, मन और दिनचर्या संतुलित रहे, तो वे पढ़ाई और जीवन दोनों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

Up Head Line
Author: Up Head Line

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