शोपीस बनकर रह गए 35 मॉडल गांवों में बने आरआरसी सेंटर

शोपीस बनकर रह गए 35 मॉडल गांवों में बने आरआरसी सेंटर

रिपोर्ट: शब्बर अली

कौशाम्बी ब्लॉक की 35 ग्रामसभाओं को मॉडल गांव का दर्जा प्राप्त है। इन ग्रामसभाओं में सूखा व गीला कचरा अलग-अलग करके रिसाइकल करने को करोड़ों की लागत से आरआरसी सेंटर बनवाया गया है। जिम्मेदारों की देखरेख के आभाव में ग्रामीणों को इसका लाभ तो मिल ही नहीं पा रहा है। कूड़ा ले जाने के लिए खरीदे गए ई-रिक्शा खराब हो रहे हैं।

ब्लॉक क्षेत्र की 35 मॉडल ग्रामसभाओं में कूड़े के निस्तारण के लिए शासन के करोड़ों रुपये से आरआरसी सेंटर बनवाए गए हैं। इन सेंटरों को बनवाने का उद्देश्य था कि ग्राम पंचायत व उसके मजरों से कूड़ा इकट्ठा करके वहां एकत्र किया जाएगा। इसके बाद अलग-अलग सूखा कचरा, गीला कचरा व प्लास्टिक कचरे को रिसाइकल कर खाद आदि बनाने काम किया जाएगा। इतना ही नहीं कूड़ा इकट्ठा करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत को में ई-रिक्शा भी खरीदा गया है। अब खड़े-खड़े ई-रिक्शा खराब हो रहे हैं या फिर ग्राम प्रधान अपने व्यक्तिगत काम में प्रयोग कर रहे हैं। बानगी के तौर पर विकास खंड की कनैली, बेरौचा, रक्सराई, कायमपुर, कोसम इनाम, बराई बधवा, रसूलपुर बड़गांव आदि ग्राम पंचायतों को लिया जा सकता है। इन गांवों में न तो आरआरसी सेंटर संचालित हैं और न ही कूड़ा गाड़ी को गांव का कचरा उठाने के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। इससे सम्बंधित गांवों के लोगों में नाराजगी है।

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Author: Up Head Line

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