आठ साल के अब्दुल्ला ने रखा पहला रोजा, देश की खुशहाली के लिए मांगी दुआ
♥दिन भर अल्लाह की इबादत करने के बाद शाम को परिवार समेत इलाके के लोगों के साथ खोला रोजा
रिपोर्ट: शब्बर अली
रमजान के पवित्र माह में जहां छोटे-बड़े बुजुर्ग और मुस्लिम महिलाएं रोजा रखकर खुदा की इबादत कर रहे हैं। ऐसे में मासूम बच्चे भी जब उन्हें देखते हैं तो उनसे प्रेरित हो ही जाते हैं। भरवारी नगर पालिका परिषद निवासी आठ वर्षीय मासूम अब्दुल्ला ने भी रोजा रखकर खुदा की इबादत की। चाचा ने बताया कि अब्दुल्ला अपने दादा हाजी महमूद अहमद की दीनी बातों से प्रभावित है। अब्दुल्ला ने मंगलवार को पहला रोजा रखकर खुदा की इबादत की।
भरवारी पुलिस चौकी के समीप रहने वाले महबूब आलत उर्फ सज्जू के आठ वर्षीय भतीजे अब्दुल्ला ने बताया कि उसने पहली बार रोजा रखा है। पिछले कई महीने से रमजान के मुबारक महीने का इंतजार कर रहे थे। पहला रोजा रखकर अल्लाह से खुदा की खुशनूदी हासिल करने के लिए भूख और प्यास को बर्दाश्त करना बड़ी बात नहीं है। रोजा रखने पर परिजनों ने उनके खाने के लिए कई पकवान बनाए। शाम को पूरे परिवार के साथ इलाके के लोगों ने भी रोजा इफ्तार में शामिल होकर अल्लाह की इबादत करने के बाद रोजा खोला। अब्दुल्लाह ने अल्लाह से दुआ मांगी कि उसे पढ़ने-लिखने में जेहन दे और नेक बनाएं। रोजा इफ्तार में शामिल हिन्दू-मुस्लिम सब लोगों ने साथ मिलकर मुल्क में अमन व शांति कायम होने की दुआ मांगी। अब्दुल्ला ने कहा कि रोजा का मकसद है कि मेरा अल्लाह मुझसे राजी हो। उसे रोजा रखकर बहुत अच्छा लग रहा है। आगे भी वह रोजा रखेंगे और अल्लाह से देश में अमन चैन की दुआ मागेंगे। मुस्लिम समाज में इस तरह से कई मासूम बच्चे और बच्चियां हर साल रोजा रखते हैं। रोजा इफ्तार के बाद हाफिज मुस्तकीम अहमद ने नमाज अदा कराई। नमाज के दौरान मुल्क में अमन चैन के लिए दुआ मांगी गई। इस मौके पर हाजी महमूद अहमद, एक्शन मिया, गुलाम हुसैन, गंगा प्रसाद केसरवानी, आफताब अहमद, मुकीद सिद्दीकी, राकेश पटेल और हाफिज इमरान आदि लोग मौजूद रहे।






