Rajasthan Election: पार्टी नहीं परिवार के लिए विधानसभा चुनाव लड़ने से पीछे कदम खींच रहे बुजुर्ग कांग्रेस विधायक


हाइलाइट्स

स्वास्थ्य और उम्र ज्यादा होने के नाम पर कांग्रेस में ‘वंश-बेल की परंपरा’ को आगे बढ़ाने में जुटे नेता
कांग्रेस के कुछ विधायक तो मौजूदा सरकार से नाराजगी के कारण भी नहीं लड़ना चाहते अगला चुनाव
विधायक कुंदनपुर का तंज- पार्टी यदि युवाओं को आगे लाना चाहती है तो गहलोत भी सीएम मोह छोड़ें

एच. मलिक

जयपुर. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Chief Minister Ashok Gehlot) और कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा की बुजुर्ग नेताओं से की गई अपील कुछ तो रंग लाने लगी है. राजस्थान विधानसभा चुनाव (Rajasthan Assembly Election) के पहले कांग्रेस के कुछ बुजुर्ग नेता चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर रहे हैं. यह अलग बात है कि वयोवृद्ध नेताओं का यह त्याग पार्टी के लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार के लिए है. ज्यादातर पार्टी के युवा नेताओं के बजाए अपने बच्चों के टिकट देने की पैरवी कर रहे हैं.

राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पिछले दिनों कहा था कि यह ठीक है कि राजनीति में कोई कटऑफ एज नहीं होती. लेकिन बड़ी उम्र वालों को खुद सत्ता का मोह त्यागकर माइलस्टोन बनना चाहिए.

‘मुझे फिर मंत्री नहीं बनाया, बेटे को तो टिकट दो’
इसी तरह पूर्व मंत्री गुरमीत कुन्नर ने भी खराब स्वास्थ्य की बात कहते हुए चुनाव लड़ने से मना किया है और कहा कि वे अपने पुत्र को चुनाव लड़वाना चाहते हैं. कुन्नर तो साफ-साफ कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर रंधावा से कह चुके हैं कि मेरे पुत्र को टिकट दे दो तो मेरी जान छूटे. हालांकि गहलोत द्वारा मंत्री न बनाए जाने से कुन्नर कुछ नाराज भी हैं. पिछले दिनों जब गहलोत द्वारा उन्हें मंत्री न बनाए जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि ये आलाकमान के हाथ में है. लेकिन साथ ही यह भी जोड़ दिया कि जो मंत्री बने है, वह भी रोते हुए घूम रहे हैं. अच्छा रहा कि मैं मंत्री नहीं बना.

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चुनाव नहीं लड़ूंगा, इसके कई कारण- हेमाराम
वन मंत्री हेमाराम चौधरी ने भी आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का मानस बना लिया है. वे कहते हैं कि चुनाव न लड़ने के एक नहीं कई कारण हैं. उनमें से एक कारण उम्र का भी है. सारी वजहें मैं समय आने पर में मीडिया के सामने रखूंगा. काबिले गौर है कि 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी हेमाराम चौधरी ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी थी. लेकिन सचिन पायलट ने हेमाराम चौधरी से मुलाकात कर उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए राजी किया था. पायलट के समर्थक हेमाराम ने गुडामालानी से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी.

पुत्र के लिए सीट छोड़ेंगे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ विधायक दीपेंद्र सिंह शेखावत ने अब चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है. सचिन पायलट के समर्थक शेखावत ने श्रीमाधोपुर की जनता का सोशल मीडिया पर आभार जताया है. उन्होंने कहा है कि अब वो चार-पांच महीने के लिए विधायक हैं. उन्होंने पोस्टर जारी करके कहा कि लोग मुझे बहुमत से चुनाव जिताने की बात कर रहे हैं, पर अब मैं स्वास्थ्य कारणों के चलते आगे चुनाव नहीं लड़ूंगा. दरअसल, शेखावत अपने पुत्र बालेन्दु सिंह शेखावत को चुनाव लड़ाना चाहते हैं. चर्चाएं सामने आ रही हैं कि वे बेटे के लिए सीट छोड़ रहे हैं. बालेन्दु सिंह शेखावत सचिन पायलट के समर्थक माने जाते हैं. पिछले दिनों दीपेंद्र सिंह शेखावत से सचिन पायलट ने मुलाकात की थी.

गहलोत भी सीएम का मोह छोड़ें, मैं भी चुनाव नहीं लड़ूंगा- भरत
कांग्रेस विधायक भरतसिंह कुंदनपुर ने युवाओं को तरजीह देने की पार्टी लाइन का समर्थन करने हुए चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी है. अपनी सरकार के खान मंत्री प्रमोद जैन भाया पर लगातार भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाते रहे कुंदनपुर ने अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भी तंज कसा है. उन्होंने कहा है कि पार्टी युवाओं को आगे लाना चाहती है. ऐसे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी आगे आकर यह घोषणा करनी चाहिए कि आगामी चुनाव में वे मुख्यमंत्री के दावेदार नहीं होगे और प्रदेश की सत्ता संभालने के लिए युवाओं को आगे करेंगे. अगर ऐसा होता है तो चुनाव में नक्शा बदल जाएगा और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रिपीट होगी.

अमीन खान बेटे को चुनाव लड़ाना चाहते हैं- ओवैसी
विधानसभा में सर्वश्रेष्ठ विधायक चुने गए बाड़मेर के शिव के विधायक अमीन खान भी चुनाव न लड़ने का एलान कर चुके हैं. पूर्व मंत्री अमीन खान ने सार्वजनिक मंचों से कहा कि अब उनकी उम्र हो गई है. अब युवाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है. अमीन के इस बयान पर मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने बाड़मेर दौरे के दौरान तंज कसा. ओवैसी ने कहा कि दरअसल वो सोच रहे हैं कि अपने बेटे को अगली बार शिव विधानसभा से विधायक बनाएंगे. लेकिन अब ऐसा नहीं होना है. चार साल से अपने क्षेत्र में काम नहीं किया. अब छह माह में क्या कर लेंगे.

Tags: Assembly election, Rajasthan Congress

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Author: Jagran Times

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