Sagar News : बाघ किशन की मौत की वजह आई सामने, ब्रेन में गहरा घाव चेहरे पर चोट के निशान और दांत टूटे मिले


अनुज गौतम/सागर: मध्यप्रदेश के सबसे बड़े नौरादेही अभ्यारण को बाघों से आबाद करने वाले बाघ किशन की मौत की वजह सामने आई है. बाघ N3 से टेरिटरी के संघर्ष के बाद N2 ने सामने पिछले 10 दिनों से कुछ भी नहीं खाया था. पोस्टमार्टम की प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों को बाघ किशन के पेट में कुछ नहीं मिला है. वह 10 दिन से भूखा था. जबड़े और सिर में गहरे घाव लगने की वजह से वह कुछ खा नहीं पा रहा था. उसके सिर में गहरा घाव मिला है और जबड़े में भी दो-तीन चोट के निशान हैं.

किशन के दांत भी टूटे मिले हैं. इन्हीं कारणों से बाघ किशन की मौत हुई है. उसके जबड़े पर जो दांतों के निशान मिले हैं, उन्हें देखकर डॉक्टर ने अंदाजा लगाया कि बाघ N3 की उम्र बाघ N2 से करीब 5 साल कम है.

7 जून को हुआ था संघर्ष
4 दिन पहले बाघ किशन का शव नौरादेही रेंज की कुसियारी बीच में मिला था. यह इलाका सिंहपुर रेंज से लगा हुआ है. अभ्यारण से निकली बामनेर नदी के एक ओर सिंहपुर और दूसरी ओर नौरादेही रेंज लगती है. दोनों बाघों के बीच टेरिटरी को लेकर संघर्ष 7 जून की रात में हुई थी.

2 घंटे तक हुई थी लड़ाई
ऐसा बताया जा रहा है कि यह घमासान इनके बीच करीब डेढ़ से 2 घंटे तक चलता रहा होगा. लड़ाई के दौरान इनकी दहाड़ रात के समय जंगल में दूर तक गूंजती रही. इसके बाद भई ट्रैकिंग महिला की टीमों को इनके बीच चल रही लड़ाई की भनक तक नहीं लगी. वन विभाग के सीसीएफ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि बाघ किशन की मौत टेरिटरी को लेकर हुए संघर्ष में घायल होने की वजह से हुई है. उसके सिर, मुंह और जबड़े में घाव के निशान मिले थे. वहीं अन्य प्रकार की जांच की जा रही है.

वहीं बाघों के मूवमेंट एरिया बढ़ाने को लेकर उन्होंने कहा नौरादेही का एरिया काफी बड़ा है. टेराटेरी को लेकर फाइट जैसी स्थिति नहीं बननी चाहिए. अब बाघ जहां मूवमेंट कर रहे हैं उसे बदल तो नहीं सकते. प्राकृतिक रूप में टेरिटरी रहती है. गांव खाली हो रहे हैं. 1500 वर्ग किलोमीटर का एरिया हमारे पास हो जाएगा.

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Author: Jagran Times

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