हाइलाइट्स
डायबिटीज के सबसे ज्यादा मरीज भारत में होने के चलते इसे मधुमेह की राजधानी कहा जाने लगा है.
देश में 50 साल से ऊपर के डायबिटिक मरीजों में डायबिटिक रेटिनोपैथी की समस्या तेजी से बढ़ रही है.
Diabetic Retinopathy: डायबिटीज या मधुमेह रोग से विश्व में करोड़ों लोग जूझ रहे हैं लेकिन भारत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. 17 फीसदी डायबिटिक मरीजों के साथ इस रोग में भारत पहले नंबर पर है. यह बीमारी इसलिए भी खतरनाक हो रही है क्योंकि हाई ब्लड शुगर की वजह से शरीर के कई अंग गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं. डायबिटिक रेटिनोपैथी ऐसी ही एक बीमारी है जो शुगर के मरीजों की आंखों की रोशनी खत्म करके उन्हें अंधा बना रही है. हाल ही में जारी की गई नेशनल डायबिटिक रेटिनोपैथी सर्वे इंडिया 2015-2019 की समरी रिपोर्ट के आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं. इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में डायबिटीज से पीड़ित 50 साल से ऊपर का हर छठा मरीज आंखों की गंभीर बीमारी डायबिटिक रेटिनोपैथी से भी जूझ रहा है.
देश में डायबिटिक रेटिनोपैथी का फैलाव जानने के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थेल्मिक साइंसेज, एम्स दिल्ली के द्वारा देश के 21 जिलों में सर्वे किया गया. ये सभी जिले नेशनल ब्लाइंडनेस एंड विजुअल इम्पेयरमेंट सर्वे 2015-19 में शामिल किए गए 31 जिलों में से चुने गए थे, जहां डायबिटीज के कारण डायबिटिक रेटिनोपैथी की बीमारी ज्यादा देखी गई है.
आरपी सेंटर एम्स दिल्ली द्वारा किए गए नेशनल डायबिटिक रेटिनोपैथी सर्वे रिपोर्ट 2015-19 के अनुसार भारत में हर छठा डायबिटिक मरीज आंखों की बीमारी झेल रहा है.
सर्वे के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर और आरपी सेंटर एम्स में कम्यूनिटी ऑप्थेल्मोलॉजी विभाग में प्रोफेसर, डॉ. प्रवीन वशिष्ठ कहते हैं, ‘डायबिटिक रेटिनोपैथी डायबिटीज के मरीजों की आंखों में होने वाली बीमारी है. इसमें आंख के पिछले हिस्से में स्थित रेटिना में ब्लड वेसेल्स क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, सूजन या धब्बे आ जाते हैं और आंखों की रोशनी या धुंधली होने लगती है. यह बीमारी आंखों को पूरी तरह अंधा भी कर देती है. हालांकि मरीजों को इसकी जानकारी आसानी से नहीं हो पाती. वे इसे सामान्य आई साइट की दिक्कतें समझकर छोड़ देते हैं और आखों की जांच ही नहीं कराते. ऐसे में ब्लड शुगर कंट्रोल न होने पर यह बीमारी आंखों की रोशनी खत्म होने का कारण बन जाती है.’
क्या कहती है सर्वे रिपोर्ट?
एनडीआर सर्वे इंडिया 2015-19 रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग हर आठवां व्यक्ति डायबिटीज से ग्रस्त है, जबकि डायबिटीज से पीड़ित हर छठा मरीज आंखों की गंभीर बीमारी डायबिटिक रेटिनोपैथी से भी जूझ रहा है. देश में डायबिटीज के कुल मरीजों का लगभग 17 फीसदी हिस्सा आंखों की इस बीमारी से पीड़ित है, वहीं 3.6 फीसदी लोग रोशनी छीनने वाली गंभीर डायबिटिक रेटिनोपैथी के शिकार बन रहे हैं.’
आंखों की जांच न कराना बड़ा कारण
नेशनल डायबिटिक रेटिनोपैथी सर्वे इंडिया रिपोर्ट कहती है कि डायबिटीज से ग्रस्त लोग आंखों की जांच ही नहीं कराते.
बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में डायबिटीज से जूझ रहे 90 फीसदी लोग आंखों की जांच ही नहीं कराते. जिसकी वजह से आंखों में आ चुके इस रोग का पता नहीं चल पाता. बेहद चौंकाने वाले आंकड़े हैं कि 89.9 फीसदी लोगों ने डायबिटीज का पता चलने के बावजूद भी कभी आंखों की जांच नहीं कराई. वहीं 6.3 फीसदी ऐसे लोग थे जिन्होंने डायबिटीज डायग्नोस होने के बाद एक साल के अंदर आंखों का चेकअप कराया था. 1.9 फीसदी ऐसे भी लोग थे जिन्होने डायबिटीज होने के 13 महीने से लेकर दो साल के अंदर आंखों की जांच कराई.
डॉ. प्रवीन वशिष्ठ बताते हैं कि सर्वे के दौरान जब मरीजों से बात की गई तो ज्यादातर लोगों का कहना था कि डायबिटीज के बाद उन्होंने कभी आंखों की जांच इसलिए नहीं कराई कि उन्हें कभी लगा ही नहीं कि उनकी आंखें खराब हैं. इतना ही नहीं डायबिटिक रेटिनोपैथी डायग्नोस होने के बाद भी बहुत सारे मरीज ऐसे भी थे जिन्होंने इसलिए इलाज नहीं लिया क्योंकि उनकी आंखों में बीमारी का कोई विशेष लक्षण नहीं था. उन्हें देखने में खास परेशानी नहीं हो रही थी.
नेशनल डायबिटिक रेटिनोपैथी सर्वे इंडिया 2015-19 के अनुसार देश में डायबिटीज से ग्रस्त 50 साल से ऊपर के 85.7 फीसदी लोग ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए गोलियों पर निर्भर हैं. वहीं 5.9 फीसदी ऐसे भी हैं जो कोई इलाज नहीं ले रहे. 5.6 फीसदी लोग दवाओं के साथ या दवा से अलग इंसुलिन ले रहे हैं और 2.9 फीसदी लोग डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए सिर्फ डाइट पर निर्भर हैं.
डॉ. वशिष्ठ आगे बताते हैं कि डायबिटिक रेटिनोपैथी के दौरान जो सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात सामने आई वह यह थी कि जिन लोगों की आंखों में डीआर पाई गई और इलाज के लिए कहा गया, उनमें अधिकांश लोगों का कहना है कि डायबिटिक रेटिनोपैथी के इलाज से पहले उन्हें डायबिटीज को ही कंट्रोल करने की दवाएं मुहैया कराई जाएं. यानि कि बहुत सारे लोगों को शुगर कंट्रोल करने की दवाएं भी नहीं मिल पा रही हैं.
डायबिटीज है तो जरूर कराएं आंखों की जांच
डॉ. वशिष्ठ कहते हैं कि सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 60.5 फीसदी लोगों का ग्लाइसेमिक कंट्रोल खराब पाया गया है, यानि कि वे ब्लड शुगर को ठीक से नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं. जबकि सिर्फ 39.5 फीसदी लोग ही दवा या किसी अन्य तरीके से शुगर को ठीक से कंट्रोल कर पा रहे हैं. ऐसे में डायबिटिक रेटिनोपैथी से बचाव के लिए डायबिटीज को कंट्रोल करने के साथ ही साल में एक बार आंखों की जांच बेहद जरूरी है. आंख में कोई परेशानी नहीं है फिर भी डायबिटीज के मरीजों को आंखों की जांच कराते रहना चाहिए ताकि रोग का जल्दी पता चल सके और उसका सही समय पर इलाज हो सके.
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FIRST PUBLISHED : June 21, 2023, 11:29 IST






