
जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया को तेजी से गर्म कर रही है. इससे दुनिया भर में तापमान बढ़ने केसाथ ही चरम मौसमी घटनाएं देखने को मिल रही हैं. खासतौर से गर्मी का मौसम, चरम सूखा, जंगलों में आग की घटनाओं की संख्या तो बढ़ रही है, साथ ही इनकी तीव्रता में भी इजाफा देखने को मिल रहा है. पिछले दो साल से यूरोप में गर्मी की मौसम कुछ ज्यादा ही कहर बरपाता दिखाई दे रहा है. पर यूरोपीय संघ और विश्व मौसम संगठन की एक संयुक्त रिपोर्ट में बताया किया गया है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है.
आज की ही बात नहीं है
रिपोर्ट में इस दावा का आधार आज या एक दो साल के आकंड़े नहीं बल्कि 1980 से जमा किए गए आंकड़े हैं. इस आधार पर पाया गया है कि यूरोप का तापमान औसत वैश्विक तापमान से 1980 के दशक की तुलना में दो गुना बढ़ा गया है. पिछले साल गर्मी के मौसम में यूरोप मे गर्मी के सारे रिकॉर्ड टूट गए थे और जिससे हजारों लोगों की जान चली गई थी.
आगे तो बार बार होगा ऐसा
इस तरह की चेतावनी अब बार बार दिए जाने की संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में यूरोप में गर्मी के नए रिकॉर्ड बन सकते है और चरम गर्मी यूरोप में चलन का स्वरूप ले सकती है. इस रिपोर्ट ऑन स्टेट ऑफ क्लाइमेंट में बताया गया है कि पिछले साल यूरोप में 16 हजार से भी ज्यादा मौतें हुई थीं.
क्या यह अचानक ही हुआ है?
यहां एक सवाल यह पैदा होता है कि क्या यह सब हाल के समय में होने वाली चरम मौसमी घटनाओं की वजह से हो रहा है या फिर यह एक तरह का स्थायी बदलाव है. इस पर कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के निदेशक डॉ कार्लो ब्योन्टेम्पो का कहना है कि दुर्भाग्य से यह सब केवल एक बार या फिर कभी कभी होने वाली जलवायु की असामान्य घटना नहीं कहा जा सकता है.
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Tags: Climate Change, Environment, Europe, Global warming, Research
FIRST PUBLISHED : June 21, 2023, 10:13 IST






