
उधव कृष्ण/पटना. इस भाग-दौड़ भरे जीवनशैली को जीने वाले लोगों में टेंशन, डिप्रेशन और फ्रस्ट्रेशन होना अब आम बात हो गई है. हालांकि, भारतीय संस्कृति में इसके लिए बहुत ही सरल परंतु प्रभावकारी उपाय भी सुझाए गए हैं. पटना सिटी के मशहूर योगगुरु अरुण श्रीवास्तव बताते हैं कि टेंशन और अवसाद जैसी समस्याओं से निजात हेतु कुछ योगासन और उपाय हैं, जिससे लोग इनसे आसानी से निपट सकते हैं.
योगाचार्य अरुण बताते हैं कि आजकल ज्यादातर लोग सिर्फ स्वार्थ सिद्धि पर ही ध्यान देते हैं. अवसाद होने का यह प्रमुख कारण है. वो आगे कहते हैं कि अगर हम अपने आसपास देखें, तो कई ऐसे लोग मिलेंगे जो कई चीजों में हमसे कमतर होंगे. ऐसे में हमारा यह कर्तव्य है कि हम अपने से कमतर लोगों की मदद करें. इससे स्वतः ही हमारे जीवन से टेंशन और अवसाद दूर होगा.
सभी प्राणायामों का गुरु है प्राणाकर्षण प्राणायाम
अरुण श्रीवास्तव बताते हैं कि प्रात:काल पूर्व दिशा में मुख कर के पद्मासन अथवा आराम आसन में ध्यान की मुद्रा में बैठकर आंखें बंद कर लें और ॐ का उच्चारण करते हुए शरीर से पूरी सांस बाहर निकाल दें. इस दौरान मन में यह भाव रहे कि आपके शरीर से सारी नकारात्मकता निकल रही है. श्वास पूरी निकल जाने के बाद कुछ देर का ठहराव लें. इसके बाद नासिका के दोनों छिद्रों से धीरे-धीरे श्वांस खींचना शुरू करें.
श्वास ग्रहण करते वक्त मन में यह भाव लाएं कि आपके अंदर प्राण शक्ति के रूप में परमात्मता स्थापित हो रहें हैं. साथ ही, आपके अंदर सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण हो रहा है. जब श्वास पूरी तरह अंदर खींच लें तो उसे कुछ देर भीतर की ओर रोके रहें. इस दौरान आत्मशुद्धि का भाव मन में रहे. इस प्रक्रिया को सुविधा अनुसार दो से चार बार दोहराएं. इसको प्राणाकर्षण प्राणायाम कहा जाता है. योगगुरु अरुण श्रीवास्तव की मानें तो इससे शरीर और मन दोनों के विकारों को दूर किया जा सकता है.
संतोषम परम सुखम है मूल मंत्र
अरुण श्रीवास्तव कहते हैं कि इसका मतलब है कि संतोष में ही परम सुख है. सभी लोगों को परमात्मा ने जो दिया है, उसमें खुश रहना आना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक की आशा रखने से भी मन मस्तिष्क को अस्थिरता और तनाव जैसे विकार घेरने लगते हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 21, 2023, 09:02 IST






